मैन्युफैक्चरिंग और 3PL ने भरी उड़ान
इस सेक्टर की शानदार ग्रोथ के पीछे मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बढ़ती मांग और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को आउटसोर्स करने का चलन मुख्य वजह है।
ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग और एनर्जी जैसे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स ने कुल लीजिंग एक्टिविटी का 48% हिस्सा लिया, यानी 9.3 मिलियन वर्ग फुट की लीज। यह दिखाता है कि कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को ग्लोबल लेवल पर बढ़ा रही हैं।
थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) सेगमेंट ने 33% मार्केट शेयर के साथ 6.4 मिलियन वर्ग फुट की लीजिंग वॉल्यूम में 64% की छलांग लगाई। यह तेजी खासकर मुंबई और NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) में देखी गई।
बदलते ट्रेंड्स और रेंट्स
हालांकि, ई-कॉमर्स की लीजिंग में पिछले साल के मुकाबले 71% की बड़ी गिरावट आई है, जो ऑनलाइन रिटेल की वेयरहाउसिंग की जरूरतों में बदलाव का संकेत देता है। दूसरी ओर, रिटेल लीजिंग दोगुना से भी ज्यादा बढ़ी है।
ऑक्यूपायर की बढ़ती डिमांड और जमीन की बढ़ती कीमतों के चलते प्रमुख बाजारों में वेयरहाउसिंग रेंट में इजाफा हुआ है। चेन्नई में सालाना 7% का सबसे ज्यादा रेंटल एप्रिसिएशन देखा गया, जबकि पुणे ₹28.5 प्रति वर्ग फुट प्रति माह के साथ सबसे महंगा बाजार बना रहा।
भविष्य की राह और चुनौतियाँ
Q1 2026 के अंत तक, आठ प्रमुख शहरों में कुल वेयरहाउसिंग स्टॉक 568 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया, और वेकेंसी रेट 11.1% पर स्थिर रहा। संस्थागत-ग्रेड (Grade A) वेयरहाउसिंग का हिस्सा अब 46% है।
इन सकारात्मक रुझानों के बावजूद, नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, शिशिर बैजल ने कहा कि जमीन की उपलब्धता और रेगुलेटरी बाधाएं भविष्य में सप्लाई बढ़ाने के लिए बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
