ब्रह्मपुत्र बनेगा भारत का पहला इनलैंड नेविगेशनल लाइटहाउस हब
भारत ने अपने अंतर्देशीय जलमार्ग विकास में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के नेतृत्व में, ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लाइटहाउस की नींव रखी गई है। देश के इनलैंड वाटरवे पर यह अपनी तरह की पहली पहल है।
NW-2 को मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म हब में बदलना
इस परियोजना पर कुल ₹84 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2) को एक सुरक्षित, सुलभ और आर्थिक रूप से जीवंत गलियारे में बदलना है। हाल के आर्थिक वर्ष 2024-25 में ब्रह्मपुत्र जलमार्ग पर कार्गो मूवमेंट में 53 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इस नदी की बढ़ती महत्ता को दर्शाती है।
ये सौर ऊर्जा से चलने वाले, 20 मीटर ऊंचे लाइटहाउस 24 घंटे सुरक्षित नेविगेशन को सक्षम बनाएंगे, जो माल और यात्री यातायात को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इन लाइटहाउस परिसरों में संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफे और स्मृति चिन्ह की दुकानें जैसी सुविधाएं भी होंगी, जो इन्हें प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेंगी। इन लाइटहाउस के 24 महीने के भीतर बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी की जरूरतें पूरी होंगी
ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों पर बोगीबील, पांडू, सिलघाट और बिस्नाथा घाट जैसे स्थानों पर इनकी रणनीतिक तैनाती NW-2 के 891 किलोमीटर लंबे नेविगेबल हिस्से को कवर करेगी। यह पूर्वोत्तर भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ लॉजिस्टिक्स की लागत अधिक रही है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि इनलैंड वाटरवे से टन माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग एक-तिहाई और रेल परिवहन की तुलना में आधी है।
सेक्टर ग्रोथ और आर्थिक अनुमान
भारत की राष्ट्रीय अवसंरचना रणनीति के तहत, इनलैंड वाटरवे परिवहन (IWT) लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने का एक प्रमुख जरिया है, जो वर्तमान में जीडीपी का लगभग 7.97% है। भारत का लक्ष्य 2047 तक माल ढुलाई में जलमार्गों की हिस्सेदारी को वर्तमान 2% से बढ़ाकर 12% करना है, और 2027 तक 76 राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू करने की योजना है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय अगले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में इनलैंड वाटरवे विकास के लिए ₹5,000 करोड़ आवंटित करने की योजना बना रहा है।
चुनौतियां: नेविगेशनल बाधाएं और कार्यान्वयन की कमियां
हालांकि, इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को लागू करने में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इनलैंड वाटरवे ट्रांसपोर्ट (IWT) की प्रति टन प्रति किलोमीटर (PTPK) लागत ₹3.30 तक हो सकती है, जो वॉल्यूम की कमी और मौजूदा बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण है। अक्सर, जलमार्ग परिवहन को धीमा माना जाता है और निजी क्षेत्र से आर्थिक व्यवहार्यता की चिंताओं के कारण 'बेरुखी' का सामना करना पड़ता है। ब्रह्मपुत्र में गाद (sediment) की अधिकता के कारण निरंतर ड्रेजिंग की आवश्यकता होती है। साथ ही, क्षेत्र के चुनौतीपूर्ण इलाके और जलवायु परिवर्तन से प्रेरित अप्रत्याशित मौसम की घटनाओं से भी बुनियादी ढांचे के विकास और संचालन में बाधा आ सकती है।