Highway Toll: 2027 तक खत्म होंगे टोल नाके! स्मार्ट सिस्टम से सालाना **₹6,000 करोड़** की बचत की तैयारी

TRANSPORTATION
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AuthorAditya Rao|Published at:
Highway Toll: 2027 तक खत्म होंगे टोल नाके! स्मार्ट सिस्टम से सालाना **₹6,000 करोड़** की बचत की तैयारी

सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम से जल्द राहत मिलेगी। भारत सरकार **2027** तक पूरे देश में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू करने जा रही है, जिससे फिजिकल टोल बूथ का झंझट खत्म हो जाएगा और सालाना **₹5,000 से ₹6,000 करोड़** के ऑपरेटिंग खर्च की बचत होगी।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) अब पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर शिफ्ट होने की तैयारी कर रही है। MLFF सिस्टम के तहत सड़कों पर कैमरा और AI-आधारित सॉफ्टवेयर लगे होंगे, जो गाड़ी की रफ्तार को कम किए बिना नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और टोल कट जाएगा।

कंपनियों के मुनाफे पर असर

अभी तक हाईवे ऑपरेट करने वाली कंपनियों को टोल बूथ के स्टाफ, बिजली और मेंटेनेंस पर भारी खर्च करना पड़ता है। नई व्यवस्था से न केवल परिचालन लागत में ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ की भारी कटौती होगी, बल्कि कुल आर्थिक लाभ सालाना ₹25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। निवेशकों के लिए यह मार्जिन में सुधार का एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।

तकनीकी जोखिम और चुनौतियां

इस डिजिटल बदलाव में एक जोखिम 'रेवेन्यू लीकेज' का भी है। अगर कैमरा नंबर प्लेट पढ़ने में गलती करता है या प्लेट डैमेज है, तो टोल कलेक्शन पर असर पड़ सकता है। इसलिए, उन कंपनियों पर नजर रखें जो मजबूत सॉफ्टवेयर और हाई-एक्यूरेसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं।

कैसे काम करेगा एनफोर्समेंट?

टोल चोरी रोकने के लिए सरकार ने इसे FASTag और VAHAN डेटाबेस से जोड़ा है। अगर टोल भुगतान में देरी हुई, तो 72 घंटे के अंदर जुर्माना देना होगा, जो कि स्टैंडर्ड टोल का दो गुना होगा। इसके अलावा, नियमों का पालन न करने वाली गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।

फिलहाल, NH-48 के सूरत-भरूच सेक्शन में इसका ट्रायल चल रहा है। निवेशकों को अब इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कंपनियां इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के शुरुआती खर्च को कैसे मैनेज करती हैं और लंबी अवधि में इसका फायदा मुनाफे में कैसे बदलता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.