भारत अब बुलेट ट्रेन के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की राह पर है। सरकार **2030** तक **350 KMPH** की रफ्तार वाली 'B35' सीरीज ट्रेनें उतारने की योजना बना रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। इस प्रोजेक्ट के केंद्र में BEML है, जो फिलहाल **249 KMPH** की क्षमता वाली B28 सीरीज पर काम कर रही है।
स्वदेशी तकनीक और BEML का रोल
सरकार अब विदेशी तकनीक, खास तौर पर जापानी E5 सीरीज पर निर्भरता कम करने के लिए तेजी से काम कर रही है। बेंगलुरु स्थित BEML का 'आदित्य' हाई-स्पीड रेल कॉम्प्लेक्स इस पहल का मुख्य केंद्र है। यहाँ तैयार हो रही B28 ट्रेनें 249 KMPH की रफ्तार के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जिनका ट्रायल रन 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, 'भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम' के जरिए सिग्नलिंग और सुरक्षा को भी पूरी तरह स्वदेशी बनाया जा रहा है, जिसे भारत की भीषण गर्मी और धूल भरे माहौल के हिसाब से तैयार किया गया है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर का खर्च
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लागत अब ₹2 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है, जो 2015 के शुरुआती अनुमानों से लगभग दोगुनी है। इस खर्च के बढ़ने के पीछे जमीन अधिग्रहण की लागत का ₹19,700 करोड़ तक पहुंचना और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में 50% की बढ़ोतरी मुख्य वजह है। अब इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग ₹399 करोड़ प्रति किलोमीटर बैठ रही है।
भविष्य की राह और निवेशकों के लिए संकेत
दिल्ली-वाराणसी और हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के ऐलान के बाद, सरकार एक मजबूत घरेलू सप्लाई चेन बनाना चाहती है। निवेशकों के लिए फिलहाल 2027 के ट्रायल रन और BEML की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर नजर रखना अहम होगा। हालांकि यह प्रोजेक्ट भविष्य के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी और बढ़ती लागत का जोखिम भी बना हुआ है।
