भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवाओं को **2028** तक लॉन्च करने की तैयारी है। **2027** से टेस्टिंग शुरू होगी। देश की प्राइवेट कंपनी Sarla Aviation अपनी 'Shunya' एयरक्राफ्ट के साथ इस पहल का नेतृत्व कर रही है। निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि Sarla Aviation एक प्राइवेट कंपनी है और इसका किसी भी पब्लिकली लिस्टेड कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
भारत में एयर टैक्सी का सफर: 2028 का लक्ष्य
भारत ने इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) विमान, जिन्हें आम बोलचाल में एयर टैक्सी कहा जाता है, के कमर्शियल ऑपरेशन 2028 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बेंगलुरु में Sarla Aviation के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि इन विमानों के लिए टेस्टिंग फेज अगले साल तेज किया जाएगा।
निवेशकों के लिए ज़रूरी सूचना
शेयर बाज़ार से जुड़े निवेशकों के लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि Sarla Aviation, पब्लिकली लिस्टेड कंपनी नहीं है। इसे Sarla Performance Fibers Ltd जैसी लिस्टेड कंपनियों के साथ भ्रमित न करें। दोनों कंपनियां पूरी तरह से अलग हैं और इनका आपस में कोई लेना-देना नहीं है।
'Shunya' एयरक्राफ्ट का विकास
Sarla Aviation अपनी 'Shunya' एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट पर फोकस कर रही है। यह एक हाइब्रिड मॉडल है जिसे 1 पायलट और 6 यात्रियों को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से डिज़ाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल (Design Organisation Approval) प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी माइलस्टोन हासिल किया है। यह अप्रूवल कंपनी को कमर्शियल फ्लाइट के लिए सर्टिफिकेशन की दिशा में डिज़ाइन और डेवलपमेंट फेज को आगे बढ़ाने की अनुमति देता है।
अपनी इंजीनियरिंग को गति देने के लिए Sarla Aviation ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म Siemens के साथ पार्टनरशिप की है। कंपनी अपने एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट को स्ट्रीमलाइन करने के लिए Siemens Xcelerator पोर्टफोलियो, जो कि डिजिटल इंजीनियरिंग टूल्स का एक सेट है, का उपयोग करने की योजना बना रही है। 'Shunya' के वर्तमान डिज़ाइन में वर्टिकल लिफ्ट और फॉरवर्ड प्रोपल्शन के लिए इलेक्ट्रिक मोटर्स का इस्तेमाल किया गया है, और उड़ते समय हाइब्रिड बैटरी रीचार्जिंग सिस्टम की भी संभावना है।
चुनौतियाँ और बाज़ार की हकीकत
भले ही 2028 का टाइमलाइन एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है, लेकिन eVTOL इंडस्ट्री को कमर्शियल स्टेज तक पहुंचने से पहले कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। सबसे बड़ी चुनौती जटिल रेगुलेटरी और सुरक्षा सर्टिफिकेशन प्रक्रियाएं हैं। चूंकि 'पावर्ड-लिफ्ट' विमानन में एक नई कैटेगरी हैं, इसलिए DGCA की यात्री सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं सख्त होंगी और डेवलपमेंट टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती हैं।
टेक्नोलॉजी के अलावा, ऑपरेशनल वायबिलिटी के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा, जैसे कि टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए डेडिकेटेड वर्टिपोर्ट्स, चार्जिंग सुविधाएं और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम। इन आवश्यकताओं के लिए भारी पूंजी निवेश और लंबे समय तक फंडिंग की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, कंपनी को ग्लोबल eVTOL निर्माताओं के साथ-साथ शहरी हवाई गतिशीलता (urban air mobility) क्षेत्र में प्रवेश करने की चाह रखने वाले अन्य लोकल प्लेयर्स से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
मंत्री नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में एयर टैक्सी की सफलता के लिए अफोर्डेबिलिटी (किफायती होना) और लोकलाइजेशन (स्थानीय उत्पादन) प्रमुख हैं। सरकार लागत कम करने के लिए पार्ट्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है, और एयर एम्बुलेंस, कार्गो डिलीवरी और शहरों और हवाई अड्डों के बीच लास्ट-माइल कनेक्टिविटी जैसे संभावित उपयोग के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, 'पावर्ड-लिफ्ट' विमानों के सर्टिफिकेशन में प्रगति और अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के लिए ज़रूरी पूंजी सुरक्षित करने की कंपनी की क्षमता से संबंधित अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए। 2028 तक का सफर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये स्टार्टअप आने वाले सालों में टेस्टिंग और रेगुलेटरी फेज को कितनी प्रभावी ढंग से नेविगेट कर पाते हैं।
