भारत सरकार अपने विदेशी भाड़ा बिल को कम करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। अगले 5 सालों में राष्ट्रीय बेड़े में 100 नए जहाज जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे सालाना $75 बिलियन की विदेशी मुद्रा बचेगी। खास बात यह है कि इसके लिए 5-सूत्रीय सुधार रोडमैप लाया जा रहा है ताकि भारतीय जहाजों की 16-20% लागत की कमी को पूरा किया जा सके।
विदेशी भाड़ा बिल पर लगाम!
भारतीय सरकार ने देश की समुद्री क्षमता को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। अगले पांच सालों में, राष्ट्रीय जहाजी बेड़े में 100 नए जहाजों को शामिल किया जाएगा। इस बड़े कदम का मकसद उस $75 बिलियन को बचाना है जो भारत हर साल कच्चे तेल, कोयला, गैस और यूरिया जैसे ज़रूरी सामानों के आयात के लिए विदेशी शिपिंग कंपनियों को देता है। घरेलू तौर पर पंजीकृत जहाजों की संख्या बढ़ाकर, सरकार विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना चाहती है और देश में ही ज़्यादा विदेशी मुद्रा रखना चाहती है।
लागत की खाई को पाटना
जहाजों का बेड़ा बढ़ाने की योजना तो बड़ी है, लेकिन शिपिंग सेक्टर को हमेशा से परिचालन लागतों (operational costs) को लेकर कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय झंडे वाले जहाज को चलाना विदेशी झंडे वाले जहाजों की तुलना में वर्तमान में 16% से 20% तक महंगा पड़ता है। इस लागत के अंतर के पीछे कई कारण हैं, जिनमें जहाज आयात और रखरखाव पर ज़्यादा घरेलू टैक्स, नाविकों के वेतन का बढ़ा हुआ खर्च और ज़्यादा डोमेस्टिक कैपिटल कॉस्ट शामिल हैं। ये संरचनात्मक बाधाएं भारतीय शिपिंग कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटर्स के साथ बराबरी का मुकाबला करना मुश्किल बना देती हैं, जिन्हें अक्सर कम लागत और ज़्यादा लचीले नियमों का फायदा मिलता है।
5-सूत्रीय सुधार रोडमैप
इन बाधाओं को दूर करने के लिए, नेशनल शिपिंग बोर्ड (National Shipping Board) ने एक 5-सूत्रीय सुधार रोडमैप (five-pillar reform roadmap) का प्रस्ताव रखा है। इस रणनीति का मुख्य फोकस राजकोषीय सुधारों (fiscal reforms) को लागू करना है, जैसे कि जहाज आयात और संचालन के लिए टैक्स को तर्कसंगत बनाना, ताकि सीधे लागत का बोझ कम हो सके। इसके अलावा, योजना में घरेलू जहाजों के लिए गारंटीकृत कार्गो सपोर्ट (guaranteed cargo support) देना, प्रतिस्पर्धी, लंबी अवधि के फाइनेंस तक पहुंच में सुधार करना और व्यापार में आसानी बढ़ाने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना शामिल है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा कारोबारी माहौल बनाना है जहां घरेलू शिपिंग कंपनियां मौजूदा लागत की बाधाओं से परेशान हुए बिना स्थायी रूप से अपने संचालन का विस्तार कर सकें।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस पहल की सफलता काफी हद तक प्रस्तावित सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार कितनी जल्दी विशिष्ट राजकोषीय प्रोत्साहन (fiscal incentives) और कार्गो सहायता उपाय लागू कर पाती है। ऐतिहासिक रूप से, समुद्री क्षेत्र में नीतिगत प्रस्तावों में कभी-कभी देरी हुई है, और विदेशी प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले 16% से 20% की लागत की खाई को पाटना इस विस्तार की स्थिरता के लिए केंद्रीय परीक्षा बनी हुई है। आने वाली बजट घोषणाओं, आधिकारिक नीति अधिसूचनाओं और इन सुधारों के संबंध में घरेलू शिपिंग कंपनियों से प्रबंधन की टिप्पणियों (management commentary) पर नज़र रखने से उद्योग की विकास गति और लाभ मार्जिन पर संभावित प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी।
