भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज ने EV चार्जर के लिए निर्धारित बेंचमार्क कीमतों में भारी कटौती की है। इस फैसले से न केवल सरकारी सब्सिडी का खर्च कम होगा, बल्कि प्राइवेट कंपनियों को भी इस सेक्टर में ज़्यादा निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
क्यों घटाईं कीमतें?
इस कटौती के पीछे मुख्य वजह EV चार्जर बनाने वाली कंपनियों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा और इक्विपमेंट की लागत में आई ज़बरदस्त कमी है। बाज़ार के परिपक्व (mature) होने के साथ, अब चार्जर बनाने की लागत पहले से काफी कम हो गई है।
कितनी हुई कटौती?
नई बेंचमार्क दरों के अनुसार, 60 kW के चार्जर की कीमत में 28% की कटौती की गई है, जबकि 30 kW के चार्जर 17% सस्ते हुए हैं। वहीं, 120 kW के चार्जर की कीमत में 13% की कमी आई है। खास बात यह है कि 100 kW के चार्जर की कीमत लगभग ₹18 लाख से घटकर करीब ₹13 लाख रह गई है। ये दाम 2022 के बाद पहली बार घटाए गए हैं।
सब्सिडी पर असर और प्राइवेट निवेश
यह नीतिगत बदलाव सरकारी सब्सिडी पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगा। PM E-Drive जैसी योजनाओं के तहत सब्सिडी के दावों में कमी आने की उम्मीद है। सरकार अब सब्सिडी के ज़रिए सीधे वित्तीय सहायता देने के बजाय, ऐसा माहौल बनाने पर ध्यान दे रही है जिससे प्राइवेट सेक्टर चार्जिंग नेटवर्क बनाने में ज़्यादा पैसा लगाए। चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स (CPOs) भी रणनीतिक जगहों पर निवेश करने के लिए तैयार हैं।
तेज़ EV पैठ और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 30% EV पैठ (penetration) हासिल करना है, जिसके लिए तेज़ी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार ज़रूरी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी काफ़ी वृद्धि हुई है, जो 29,200 से बढ़कर 2025 तक 39,485 तक पहुंच सकती है। अनुमान है कि 2030 तक भारत को लगभग 1.32 मिलियन चार्जिंग स्टेशनों की ज़रूरत होगी।
बाज़ार की चाल: विकास और प्रतिस्पर्धा
भारत का EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह बाज़ार $1,901.2 मिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसमें 27.8% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिलेगी। यह नीतिगत बदलाव इस विकास को और गति देगा।
कीमतें कम होने से EV चार्जिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज़ होने की उम्मीद है। कई कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाएंगी। हालांकि, चार्जर्स के असमान वितरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ज़रूरत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। बाज़ार के परिपक्व होने के साथ, इस सेक्टर में और अधिक एकीकरण (consolidation) और दक्षता (efficiency) देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि 2025 में यह बाज़ार $0.71 बिलियन का था, जो 2030 तक बढ़कर $2.48 बिलियन हो सकता है, जिसमें 28.5% की CAGR की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि फास्ट चार्जर बाज़ार के बड़े रेवेन्यू का मुख्य जरिया बनेंगे।
