Shipbuilding Sector: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हुआ बड़ा करार, शिपयार्ड्स में आएगी नई टेक्नोलॉजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Shipbuilding Sector: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हुआ बड़ा करार, शिपयार्ड्स में आएगी नई टेक्नोलॉजी

केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया में 'VOYAGES' फ्रेमवर्क लॉन्च किया है। इसका मकसद भारतीय शिपयार्ड्स में एडवांस टेक्नोलॉजी लाना और मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार देना है, ताकि देश 'Maritime India Vision 2030' के लक्ष्य को हासिल कर सके।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल इन दिनों दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने एक नए एग्रीमेंट 'VOYAGES' फ्रेमवर्क की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कोरिया की वर्ल्ड-क्लास शिपबिल्डिंग एक्सपर्टीज को भारत की समुद्री विकास योजनाओं से जोड़ना है।

क्या है मास्टर प्लान?

इस साझेदारी के तहत मुख्य रूप से शिप डिजाइन, लॉजिस्टिक्स और टेक्निकल ट्रेनिंग पर फोकस किया जाएगा। मंत्री सोनोवाल ने इस दौरान Samsung Heavy Industries, Hanwha Ocean और HD Hyundai जैसी बड़ी कोरियाई कंपनियों के साथ चर्चा की है। सरकार का इरादा भारतीय इंजीनियरों को ट्रेन करना है ताकि 'Maritime India Vision 2030' और 'Maritime Amrit Kaal Vision 2047' के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

भारतीय शेयर बाजार के लिहाज से देखें तो Cochin Shipyard और Mazagon Dock Shipbuilders जैसे प्लेयर्स के लिए यह एक बड़े मौके की तरह है। अब तक ये कंपनियां मुख्य रूप से डिफेंस और निश (niche) जहाजों पर निर्भर रही हैं, लेकिन कमर्शियल जहाजों के मामले में तकनीक के लिए उन्हें आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर 'VOYAGES' फ्रेमवर्क से टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर सुचारू रूप से होता है, तो इन कंपनियों की प्रोडक्शन क्षमता और ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने की ताकत बढ़ सकती है।

चुनौतियां भी कम नहीं

शिपबिल्डिंग एक कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर है। टेक्नोलॉजी को अपनाना और इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना काफी खर्चीला हो सकता है, जिससे मार्जिन पर दबाव पड़ने का रिस्क बना रहता है। साथ ही, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे दिग्गज मैन्युफैक्चरर्स से टक्कर लेने के लिए भारतीय कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को काफी बेहतर करना होगा। निवेशकों को इस साझेदारी के बाद होने वाले इंफ्रा प्रोजेक्ट्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.