Shipbuilding Industry: जहाजरानी क्षेत्र के लिए बड़ी राहत! सरकार लेकर आई नई Credit Insurance पॉलिसी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Shipbuilding Industry: जहाजरानी क्षेत्र के लिए बड़ी राहत! सरकार लेकर आई नई Credit Insurance पॉलिसी

Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने शिपयार्ड्स को आर्थिक अस्थिरता से बचाने के लिए दो नई क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस पॉलिसी लॉन्च की हैं। यह कदम प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण होने वाली कैश फ्लो की समस्या को दूर करेगा।

क्या है सरकार का मास्टर प्लान?

शिपबिल्डिंग एक ऐसा बिजनेस है जिसमें प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में कई साल लग जाते हैं। अक्सर पेमेंट में देरी या माइलस्टोन-आधारित बिलिंग की वजह से शिपयार्ड्स को कैश फ्लो की तंगी का सामना करना पड़ता है। अब, 13 अक्टूबर, 2026 को 21वीं Maritime State Development Council की बैठक में सरकार ने इस सेक्टर की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए दो पॉलिसी पेश की हैं।

कौन सी हैं ये दो नई पॉलिसी?

  1. SbPCP (Shipbuilding Project Credit Risk Insurance Policy): इसे ECGC Ltd द्वारा मैनेज किया जाएगा, जो खास तौर पर एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देगा।

  2. BCSPS (Business Credit Shield Policy–Shipbuilders): घरेलू प्रोजेक्ट्स के लिए इसे The New India Assurance Co Ltd के जरिए पेश किया गया है।

सरकार इन पॉलिसी के प्रीमियम पर सब्सिडी देगी और क्लेम लायबिलिटीज के लिए सीधे सपोर्ट करेगी, जिससे शिपयार्ड्स पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

यह कदम शिपबिल्डिंग कंपनियों की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने वाला है। बाहरी प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग पर निर्भरता कम होने से कंपनियों का वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट बेहतर हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि यह केवल एक रिस्क-मिटिगेशन टूल है। ग्लोबल डिमांड और इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। आने वाली कुछ तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि ये पॉलिसी कितनी कुशलता से ग्राउंड लेवल पर वर्किंग कैपिटल का तनाव कम कर पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.