सरकार ने हवाई टिकटों पर किसी भी तरह की अधिकतम सीमा (Price Cap) लगाने से इनकार कर दिया है। 'भारतीय वायुयान अधिनियम 2024' के तहत अब एयरलाइंस को अपनी कीमतों में पारदर्शिता रखनी होगी और DGCA के पास फेयर रेंज फाइल करनी होगी।
केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए फिक्स्ड एयरफेयर कैप लगाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। इसके बजाय, सरकार अब 'भारतीय वायुयान अधिनियम 2024' के जरिए एक पारदर्शी मॉडल पर जोर दे रही है। यह फैसला एयरलाइंस के लिए बड़ी राहत है, जो पहले से ही बेहद कॉम्पिटिटिव माहौल और भारी लागत के दबाव में काम कर रही हैं।
कैसे काम करेगा नया नियम?
नए फ्रेमवर्क के तहत, अब एयरलाइंस को अपना किराया स्ट्रक्चर DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के सामने पेश करना होगा। इससे टिकट की कीमतें एयरलाइंस द्वारा पहले से तय दायरे (Range) में ही रहेंगी, न कि सरकार द्वारा थोपी गई किसी सीमा में। एयरलाइंस को अब टिकट की कुल लागत के हर हिस्से को साफ तौर पर बताना होगा, जिसमें बेस फेयर, टैक्स, सरचार्ज और यूजर डेवलपमेंट फीस शामिल है। साथ ही, कैंसिलेशन और रिफंड पॉलिसी का खुलासा करना भी अनिवार्य होगा।
एविएशन सेक्टर के लिए क्यों है जरूरी?
एविएशन इंडस्ट्री लंबे समय से ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना कर रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव से एयरलाइंस के मार्जिन पर काफी असर पड़ता है। कीमतों को फ्लेक्सिबल रखने से एयरलाइंस को अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे एयरलाइंस को नुकसान में उड़ान भरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
इमरजेंसी के लिए 'सेफ्टी वाल्व'
हालांकि बाजार अब कीमतों को तय करने के लिए आजाद है, लेकिन सरकार ने एक सुरक्षा कवच भी रखा है। प्राकृतिक आपदा या आपातकालीन स्थितियों के दौरान सरकार के पास किरायों को नियंत्रित करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा ताकि यात्रियों का शोषण न हो। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि एयरलाइंस इस नई रेगुलेटरी जरूरतों को कैसे अपनाती हैं और आने वाले समय में इसका टिकट प्राइसिंग पर क्या असर पड़ता है।
