दुनियाभर में नाविक सप्लाई में भारत का दबदबा! 12% हिस्सेदारी के साथ दूसरे पायदान पर

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AuthorAditya Rao|Published at:
दुनियाभर में नाविक सप्लाई में भारत का दबदबा! 12% हिस्सेदारी के साथ दूसरे पायदान पर

भारतीय नाविक अब दुनिया की शिपिंग इंडस्ट्री में 12.16% की हिस्सेदारी के साथ दूसरे सबसे बड़े सप्लायर बन गए हैं। 2015 में जहां यह आंकड़ा सिर्फ 5.2% था, वहीं अब भारत इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा चुका है। सरकार 'मिशन 20 प्रतिशत' के जरिए वैश्विक स्तर पर 20% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

नाविकों का सबसे बड़ा सप्लायर

भारत का समुद्री क्षेत्र एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर चुका है। BIMCO-ICS सीफेरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारतीय प्रोफेशनल अब ग्लोबल मर्चेंट शिपिंग वर्कफोर्स का 12.16% हिस्सा हैं। यह 2015 के 5.2% के आंकड़े से एक बड़ी उछाल है, जिसने चीन, रूस और इंडोनेशिया जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।

मजबूत हुआ समुद्री कार्यबल

खास तौर पर हाई-स्किल्ड ऑफिसर सेगमेंट में भारत का योगदान काबिले तारीफ है। भारत वर्तमान में 140,000 से अधिक ऑफिसर सप्लाई करता है, जो वैश्विक कुल का 13.41% है। इसके अलावा, भारत 171,000 से अधिक रेटिंग्स (Ratings) भी सप्लाई करता है, जो मर्चेंट जहाजों पर काम कर रहे वैश्विक रेटिंग्स का 11.29% है। समुद्री शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व ट्रेनिंग मानकों के पालन ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है, जो ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री में रोजगार के लिए बेहद जरूरी हैं।

'मिशन 20 प्रतिशत' का असर

केंद्रीय पोर्ट, शिपिंग और वॉटरवेज मंत्रालय ने वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति को और बढ़ाने के लिए 'मिशन 20 प्रतिशत' लॉन्च किया है। इसका लक्ष्य ग्लोबल सीफेयरिंग वर्कफोर्स में 20% हिस्सेदारी हासिल करना है। यह पहल मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी लंबी अवधि की रणनीतियों का हिस्सा है, जिनका मकसद भारत को एक ग्लोबल मैरीटाइम हब के तौर पर स्थापित करना है। ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग पर फोकस करके, सरकार समुद्री पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखती है, क्योंकि ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री में कुशल श्रमिकों की कमी है।

समुद्री क्षेत्र के लिए मायने

घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए, नाविकों की सप्लाई में वृद्धि से विदेशी मुद्रा प्रेषण (Foreign Exchange Remittances) में बढ़ोतरी होती है, जो समुद्री सेवा क्षेत्र के लिए आय का एक अहम जरिया है। जैसे-जैसे भारत भविष्य की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है, ट्रेनिंग की क्वालिटी को बनाए रखना अहम होगा ताकि फिलीपींस जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा की जा सके, जो अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर है। समुद्री शिक्षा, लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेवा क्षेत्रों के निवेशक और हितधारक इन ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रगति और भारतीय कैडेट्स के लिए उच्च अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट हासिल करने में 'मिशन 20 प्रतिशत' की सफलता पर नजर रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.