रेल मंत्रालय का PPP की ओर झुकाव: वजह क्या है?
सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च कर रही है, और इसी के साथ भारत के रेल मंत्रालय में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खर्च सचिव V Vualnam के नेतृत्व में, अब रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मॉडल की जगह PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार का लक्ष्य केवल पैसा खर्च करना नहीं, बल्कि 'फिस्कल प्रूडेंस' (राजकोषीय विवेक) बनाए रखते हुए इकोनॉमी के लिए ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना है, खासकर जब देश की इकोनॉमी लगभग 7% की दर से बढ़ रही है।
रिकॉर्ड कैपेक्स का 'Multiplier Effect'
आने वाले फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) तय किया है। यह भारी-भरकम निवेश इकोनॉमी में 'Multiplier Effect' पैदा करता है, यानी हर एक रुपये के निवेश से कई गुना ज्यादा फायदा होता है। इस कैपेक्स की बदौलत रेलवे प्रोजेक्ट्स को नई जान मिलने की उम्मीद है।
हाईवे सेक्टर से सीख, रेलवे में PPP को बढ़ावा
सरकार ने हाईवे सेक्टर में PPP मॉडल से मिले सबक को रेलवे में लागू करने का फैसला किया है। हाईवे प्रोजेक्ट्स में PPP मॉडल ने न केवल प्रोजेक्ट को समय पर और बेहतर क्वालिटी के साथ पूरा करने में मदद की है, बल्कि फाइनेंसिंग (वित्तपोषण) को भी आसान बनाया है। ठीक इसी तरह, रेलवे में भी अब प्राइवेट सेक्टर की विशेषज्ञता और पूंजी का उपयोग करके प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी और फाइनेंसिंग को मजबूत किया जाएगा।
स्टेशन डेवलपमेंट पर खास फोकस
रेलवे में PPP मॉडल को अपनाने का एक बड़ा और खास फोकस 'स्टेशन डेवलपमेंट' यानी रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण पर रहेगा। भोपाल स्टेशन के सफल प्रोजेक्ट्स के बाद, अब नई दिल्ली जैसे प्रमुख स्टेशनों को आधुनिक बनाने की योजना है, जहाँ कमर्शियल क्षमता बहुत ज्यादा है। इससे न सिर्फ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे के लिए रेवेन्यू के नए रास्ते भी खुलेंगे।