इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव: रेलवे को रिकॉर्ड कैपेक्स
Union Budget 2026 में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर अपना मजबूत फोकस बनाए रखते हुए भारतीय रेलवे के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 हेतु ₹2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) का आवंटन किया है। यह पिछले साल के ₹2.52 लाख करोड़ के मुकाबले 10.3% की बड़ी बढ़ोतरी है। इसके अलावा, एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज (EBR) से ₹15,000 करोड़ और जुड़ने की उम्मीद है, जिससे कुल आउटले और मजबूत होगा। बजट डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, रेलवे की कुल कमाई ₹3.86 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि खर्च ₹3.82 लाख करोड़ का होगा, जिससे ₹3,500 करोड़ से अधिक का सरप्लस (अतिरिक्त लाभ) होने की उम्मीद है। यह भारी निवेश इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च को आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन मानने का संकेत देता है, भले ही रेलवे के अपने फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर सवाल बने हुए हैं।
7 नई हाई-SPEED ट्रेनें और शेयर बाजार का रिएक्शन
बजट की एक बड़ी घोषणा यह भी है कि देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले 7 नए हाई-SPEED रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इनमें मुंबई-पुणे, दिल्ली-वाराणसी और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे रूट शामिल हैं। इस पहल का मकसद यात्रियों की आवाजाही को ज्यादा कुशल और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
इसके जवाब में, बजट वाले दिन रेलवे से जुड़ी सरकारी कंपनियों (PSUs) के शेयरों में अलग-अलग रुझान देखने को मिला। Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) और Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) जैसे शेयरों में लगभग 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो भविष्य में प्रोजेक्ट मिलने और परिचालन ग्रोथ को लेकर निवेशकों के भरोसे को दिखाती है। हालांकि, Ircon International और Rail Vikas Nigam जैसी अन्य प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर केंद्रित PSUs को नुकसान उठाना पड़ा, जो मार्केट की चुनिंदा प्रतिक्रिया का संकेत देता है। BSE Sensex और NSE Nifty जैसे ब्रॉडर मार्केट में लगभग 2% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव था। इस टैक्स बढ़ोतरी ने सेक्टर-विशिष्ट सकारात्मक खबरों पर पानी फेर दिया।
वित्तीय और परिचालन चुनौतियां जस की तस
इतने बड़े कैपेक्स के बावजूद, भारतीय रेलवे की अंदरूनी वित्तीय चुनौतियां बनी हुई हैं। 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेशियो 98.43% रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा अकाउंटिंग एडजस्टमेंट के जरिए हासिल किया गया है, जिसमें पेंशन और डेप्रिसिएशन फंड के लिए आवंटन बेहद कम रखा गया है। रेवेन्यू परफॉर्मेंस भी उम्मीद से पीछे रहा है। 2025-26 के लिए पैसेंजर सेगमेंट से रेवेन्यू ₹92,800 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹80,000 करोड़ ही रहा। वहीं, फ्रेट (माल ढुलाई) रेवेन्यू ₹1.88 लाख करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1.78 लाख करोड़ तक ही पहुंच पाया। यह दर्शाता है कि रेलवे पर्याप्त आंतरिक सरप्लस (बचत) उत्पन्न करने में असमर्थ है, जिससे कैपिटल एक्सपेंडिचर काफी हद तक सरकारी बजटीय सहायता पर निर्भर रहता है। हालांकि, प्रीमियम ट्रेनों की मांग के चलते, FY26 में पैसेंजर रेवेन्यू में 16% की बढ़ोतरी होकर ₹92,800 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि फ्रेट रेवेन्यू ग्रोथ 4.4% की दर से धीमी रहेगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का रीडेवलपमेंट और प्राइवेटाइजेशन पर चर्चा
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) जैसे महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी है, जिनके बड़े हिस्से पहले ही चालू हो चुके हैं। इनका मकसद लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाना और ट्रांजिट टाइम को कम करना है। 'अमृत भारत स्टेशन स्कीम' के तहत स्टेशनों के रीडेवलपमेंट का काम भी आगे बढ़ रहा है। हालांकि, कुछ स्टेशनों जैसे लखनऊ के गोमतीनगर स्टेशन पर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर चुनौतियां बताई गई हैं।
पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने रेलवे से अपने निर्माण और रेवेन्यू मॉडल पर फिर से विचार करने को कहा है, जिससे प्राइवेट कैपिटल (पूंजी) लाने, फ्लेक्सिबल कॉन्ट्रैक्टिंग और मांग का सटीक आकलन करने की दिशा में संकेत मिलते हैं। लेकिन, बजट घोषणाओं में मैन्युफैक्चरिंग और स्टेशन रीडेवलपमेंट में प्राइवेटाइजेशन (निजीकरण) की कोई ठोस योजना नहीं दिखी। सुरक्षा और नेटवर्क कमांड पर नियंत्रण से समझौता किए बिना प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने की बहस एक महत्वपूर्ण नीतिगत चर्चा बनी हुई है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर का आउटलुक और बाजार का सेंटिमेंट
रेलवे के प्रदर्शन से गहराई से प्रभावित लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें खंडित नेटवर्क, कुशल श्रमिकों की कमी और परिचालन लागत में वृद्धि शामिल है। हालांकि, लगातार सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और 'नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी' जैसी पहलों से एक अधिक एकीकृत और कुशल इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य है।
बजट वाले दिन बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया पर STT में बढ़ोतरी का प्रभुत्व रहा, जिससे सूचकांकों में व्यापक गिरावट आई। भले ही RVNL और IRCTC जैसे रेलवे PSUs ने हाई-स्पीड कॉरिडोर की घोषणाओं पर कुछ शुरुआती बढ़त दिखाई, लेकिन टैक्स बढ़ोतरी और भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिरता व परिचालन दक्षता संबंधी लगातार चिंताओं ने समग्र सेंटिमेंट को प्रभावित किया।