भारत अगले दशक में एक दर्जन से ज़्यादा नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करने के लिए ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश करने की तैयारी में है। यह कदम कार्गो ट्रैफिक में आई भारी तेज़ी के बाद उठाया जा रहा है, जो 2014-15 में 29 मिलियन टन से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक लगभग 198 मिलियन टन हो गया था। सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए इन मार्गों को रेल और सड़क नेटवर्क के साथ जोड़कर आर्थिक गलियारे (economic corridors) बनाना है।
जलमार्गों का महा-विस्तार: ₹10,000 करोड़ के निवेश की योजना
केंद्र सरकार 'Maritime Amrit Kaal Vision 2047' के तहत देश के आंतरिक जलमार्गों (inland waterways) के विकास में तेज़ी ला रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, अगले 5 से 10 सालों में ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा के निवेश से एक दर्जन से ज़्यादा नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किए जाएंगे। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि इस सेक्टर में कार्गो वॉल्यूम में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। 2014-15 में जहां यह आंकड़ा केवल 29 मिलियन टन था, वहीं फरवरी 2026 तक यह बढ़कर लगभग 198 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।
आर्थिक गलियारों का निर्माण
सरकार की मंशा सिर्फ़ नेविगेशन (navigation) को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है। फोकस इस बात पर है कि इन जलमार्गों को ऐसे आर्थिक गलियारों (economic corridors) में बदला जाए जो इंडस्ट्रियल क्लस्टर (industrial clusters) को सीधे पोर्ट, फ्रेट टर्मिनल (freight terminals) और सड़क या रेल नेटवर्क से जोड़ें। माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करके, इस पहल का मकसद भारत में लॉजिस्टिक्स की कुल लागत को कम करना है। 2026 की शुरुआत तक, 111 घोषित राष्ट्रीय जलमार्गों में से 32 चालू हो चुके हैं। विस्तार योजना में फ्रेट विलेज (freight villages), जहाज मरम्मत सुविधाएं (ship repair facilities) और टर्मिनल जैसी नई इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) को शामिल किया गया है ताकि इन मार्गों को व्यावसायिक रूप से आकर्षक बनाया जा सके।
परिचालन और पर्यावरणीय चुनौतियां
कार्गो में हुई इस भारी वृद्धि के बावजूद, आंतरिक जलमार्गों के विकास में कई व्यावहारिक और पर्यावरणीय बाधाएं सामने हैं। साल भर नेविगेशन के लिए पर्याप्त पानी की गहराई बनाए रखना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है, क्योंकि कई नदियों में पानी का स्तर मौसम के अनुसार बदलता रहता है। चैनलों को खुला रखने के लिए अक्सर बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग (dredging) की आवश्यकता होती है, जिससे नदी पारिस्थितिकी तंत्र (river ecosystems) और जैव विविधता (biodiversity) पर, खासकर जलीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
इसके अलावा, इस सेक्टर का पिछला इतिहास बताता है कि सभी जलमार्ग परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से सफल नहीं होतीं। सरकार को पहले 63 अधिसूचित जलमार्गों पर काम रोकना पड़ा था, जब उन्हें तकनीकी या वित्तीय रूप से अव्यवहार्य पाया गया था। भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ये नए मार्ग निजी उद्योगों से पर्याप्त मांग पैदा कर पाते हैं और शिपर्स (shippers) के लिए विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु पानी का स्तर लगातार बना रहता है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर अप्रत्यक्ष प्रभाव
स्टॉक मार्केट (stock market) के जानकारों के लिए, यह विकास लॉजिस्टिक्स (logistics), इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) और कंस्ट्रक्शन (construction) सेक्टर पर अप्रत्यक्ष रूप से असर डालेगा। ड्रेजिंग, पोर्ट टर्मिनल कंस्ट्रक्शन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन से जुड़ी कंपनियों को इन परियोजनाओं के शुरू होने पर अधिक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, इन कंपनियों को होने वाले फायदे परियोजना निष्पादन की गति, निजी निवेश हासिल करने की क्षमता और कार्गो मालिकों द्वारा इन जलमार्गों के वास्तविक उपयोग पर निर्भर करेंगे। निवेशक इन जलमार्ग टर्मिनलों में नई राजस्व धाराओं की क्षमता को समझने के लिए प्रोजेक्ट टेंडरों (project tenders) और निजी भागीदारी पर अपडेट पर नज़र रख सकते हैं।
