सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू ने देश में **66** नए एयरपोर्ट बनाने का ऐलान किया है। भारत का लक्ष्य दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट बनने का है और इसके लिए सरकार 'Routes Asia 2027' समिट में **115** एयरलाइन्स के साथ बातचीत करेगी।
बड़े प्लान की तैयारी
सरकार का यह महत्वाकांक्षी कदम भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत एविएशन हब बनाने की दिशा में है। दिल्ली में 16-18 मार्च 2026 तक होने वाली 'Routes Asia 2027' समिट इस पूरी रणनीति का मुख्य केंद्र होगी। सरकार का इरादा 55 देशों की 115 एयरलाइन्स के प्रतिनिधियों के साथ सीधे नेगोशिएशन करने का है ताकि नए इंटरनेशनल रूट तैयार किए जा सकें।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टर्स के लिए मौके
इस बड़े विस्तार का फायदा सीधे तौर पर Adani Airports, GMR Airports और Airports Authority of India जैसी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। वहीं, IndiGo और Air India जैसी घरेलू एयरलाइन्स के लिए यह नए रूट्स और स्लॉट विस्तार का बड़ा जरिया बन सकता है। पिछले 15 महीनों में सरकार पहले ही 55 नए इंटरनेशनल रूट्स शुरू कर चुकी है।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियाँ
हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एक कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस है। इसमें भारी निवेश की जरूरत होती है और प्रोजेक्ट्स के मुनाफे में आने में लंबा समय लग सकता है। इसके अलावा, लागत बढ़ने (Cost overruns) और प्रोजेक्ट्स में देरी होने का रिस्क हमेशा बना रहता है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान न देखें, बल्कि पैसेंजर ट्रैफिक की ग्रोथ और कंपनियों के डेट लेवल पर भी नजर रखें, क्योंकि बिना पर्याप्त डिमांड के ऑपरेटरों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
