केंद्र सरकार ने अगले **10 साल** के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसके तहत **₹28,840 करोड़** के निवेश से **100** नए एयरपोर्ट्स और **200** हेलीपैड्स तैयार किए जाएंगे, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में एयर कनेक्टिविटी को रफ्तार मिलेगी।
भारत के एविएशन नेटवर्क को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इस प्रोजेक्ट के तहत साल 2035-36 तक 100 नए एयरपोर्ट्स और 200 आधुनिक हेलीपैड्स का निर्माण किया जाएगा। यह पूरा काम UDAN स्कीम के नए वर्जन के तहत किया जाएगा। सरकार का फोकस इस बार नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स बनाने के बजाय पुराने और बंद पड़े एयरस्ट्रिप्स को फिर से चालू (Revive) करने पर है, ताकि लागत को कम किया जा सके और काम तेजी से हो।
हब-एंड-स्पोक मॉडल का फॉर्मूला
सरकार एयर ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए 'हब-एंड-स्पोक' (Hub-and-Spoke) मॉडल अपना रही है। इसके तहत वाराणसी, अमृतसर और अहमदाबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स को हब बनाकर वहां से छोटे शहरों (स्पोक्स) के लिए फ्लाइट्स जोड़ी जाएंगी। इससे छोटे शहरों के यात्रियों के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
निवेशकों के लिए मौके और रिस्क
यह खबर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है। रनवे रिहैबिलिटेशन, टर्मिनल कंस्ट्रक्शन और इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन सिस्टम का काम करने वाली कंपनियों को बड़े ऑर्डर्स मिल सकते हैं।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। छोटे शहरों में पैसेंजर डिमांड की कमी, जमीन अधिग्रहण में देरी और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे मुद्दे इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। इसके अलावा, कई रीजनल रूट्स का प्रॉफिटेबल होना भी एक बड़ा सवाल है, क्योंकि सरकार की सब्सिडी के बिना इनका संचालन मुश्किल हो सकता है। निवेशकों को एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडर्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए ताकि प्रोजेक्ट के सही एग्जीक्यूशन का अंदाजा लग सके।
