पाकिस्तान के इस फैसले का भारतीय एयरलाइन्स पर सीधा और भारी असर पड़ रहा है। अब जबकि यह बैन एक साल से ज़्यादा लंबा खिंच गया है, भारतीय एयरलाइन्स को लागत के मामले में बड़ी चोट लग रही है।
उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, लंबी उड़ानों और बढ़ते फ्यूल खर्च के चलते भारतीय एयरलाइन्स को सालाना लगभग ₹7,000 करोड़ (लगभग 80 करोड़ से 1 अरब डॉलर) का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसमें अकेले Air India को करीब ₹4,000 करोड़ का सालाना नुकसान होने का अनुमान है, जबकि IndiGo को भी लगभग ₹1,300 करोड़ का झटका लग सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि उड़ानों को पाकिस्तान के ऊपर से जाने के बजाय लंबा रूट लेना पड़ता है, जिससे यात्रा के समय में 15 मिनट से लेकर कई घंटे तक की बढ़ोतरी हो जाती है। इसके लिए ज्यादा फ्यूल की ज़रूरत पड़ती है और क्रू शेड्यूलिंग भी जटिल हो जाती है। IndiGo को तो कुछ खास रूट्स, जैसे कि सेंट्रल एशियन शहरों की उड़ानें, फिलहाल बंद करनी पड़ी हैं, क्योंकि पाकिस्तानी एयरस्पेस से बचने के लिए तय किए गए लंबे रूट्स उनके एयरक्राफ्ट की रेंज के बाहर हैं। यह स्थिति 2019 के उस चार महीने के एयरस्पेस बैन की याद दिलाती है, जिसमें भारतीय एयरलाइन्स को लगभग ₹700 करोड़ का कुल नुकसान हुआ था। बाजार के मौजूदा आंकड़ों पर नज़र डालें तो IndiGo (InterGlobe Aviation) का P/E रेश्यो फरवरी 2026 तक लगभग 59.79-60.08 के आसपास बना हुआ है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन फरवरी 2026 तक लगभग ₹1.92 ट्रिलियन था। यह आंकड़े एक ग्रोथ स्टॉक की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इन सब के बीच एयरस्पेस बैन जैसी भू-राजनीतिक बाधाएं कंपनी की लागत बढ़ा रही हैं।
इस एयरस्पेस बैन का असर भारत और पाकिस्तान की एयरलाइन्स पर एक जैसा बिल्कुल नहीं है। इसकी वजह है दोनों देशों की एयरलाइन्स के नेटवर्क में बड़ा अंतर। पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बहुत ही सीमित है, और भारत के हवाई क्षेत्र से होकर उसकी पहले से ही बहुत कम उड़ानें गुजरती थीं। इसलिए, भारत की ओर से जवाबी बैन का PIA पर न के बराबर असर पड़ा है। इसके विपरीत, IndiGo और Air India जैसी बड़ी भारतीय एयरलाइन्स के पश्चिम की ओर जाने वाले रूट काफी बड़े हैं, और पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से उनके ऑपरेशंस सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर, PIA खुद सालों से भारी नुकसान झेल रही है और 2.5 अरब डॉलर से ज़्यादा के कर्ज़ तले दबी है। ऐसे में, दिसंबर 2025 में Arif Habib Group के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम ने 48.2 करोड़ डॉलर में PIA की 75% हिस्सेदारी खरीदकर इसे निजीकरण (privatization) की ओर बढ़ाया है। यह स्थिति भारतीय एयरलाइन्स की विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से बिल्कुल अलग है। उदाहरण के लिए, Air India ने अपनी फ्लीट को आधुनिक बनाने की बड़ी योजना के तहत 30 नए Boeing 737 MAX जेट का ऑर्डर दिया है।
इन सब के बावजूद, भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र (civil aviation sector) दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बना हुआ है। उम्मीद है कि यह जल्द ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू बाजार बन जाएगा। बढ़ती आमदनी, सरकारी योजनाएं जैसे UDAN, और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार हो रहा विकास इस सेक्टर के विकास के मुख्य इंजन हैं। मगर, सेक्टर को कई बड़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। कड़ी प्रतिस्पर्धा, ऑपरेटिंग कॉस्ट का बहुत ज्यादा होना (जिसमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल का खर्च 30-45% तक होता है), कंपनियों की वित्तीय कमजोरी, और हाल की कुछ अप्रत्याशित घटनाएं जैसे कि अहमदाबाद विमान हादसा और IndiGo की उड़ानों का रद्द होना, ये सब मिलकर फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में पूरे उद्योग के लिए ₹17,000–18,000 करोड़ के कुल नेट लॉस का अनुमान लगा रहे हैं। पाकिस्तान के साथ एयरस्पेस को लेकर चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical friction) इन तमाम चुनौतियों में एक और अहम फैक्टर है, जो इस सेक्टर की कमाई की क्षमता को कम कर सकता है और इसके पूरी तरह से उबरने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, भले ही यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही हो।