वाहनों में V2V तकनीक अनिवार्य! अक्टूबर 2028 से सभी नई गाड़ियों पर लागू होगा नया नियम

TRANSPORTATION
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
वाहनों में V2V तकनीक अनिवार्य! अक्टूबर 2028 से सभी नई गाड़ियों पर लागू होगा नया नियम

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, 1 अक्टूबर 2028 से भारत में बनने वाली सभी नई गाड़ियों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद गाड़ियों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग से सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है। निवेशकों को ऑटोमेकर्स द्वारा इस नई AIS-230 स्टैंडर्ड के इंटीग्रेशन कॉस्ट और टेक्निकल जरूरतों को पूरा करने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए।

नई गाड़ियों में V2V कम्युनिकेशन होगा अनिवार्य

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें भारत में बनने वाली सभी नई गाड़ियों के लिए व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। यह नियम L, M, और N कैटेगरी के वाहनों पर लागू होगा, जिसमें दोपहिया, तिपहिया, पैसेंजर कारें और कमर्शियल गुड्स कैरियर शामिल हैं। यह 1 अक्टूबर, 2028 के बाद निर्मित होने वाले वाहनों पर लागू होगा। इस बदलाव को आसान बनाने के लिए, सरकार ने 1 अक्टूबर, 2027 से एक वॉलंटरी एडॉप्शन पीरियड भी प्रस्तावित किया है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स समय सीमा से पहले टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट कर सकें।

AIS-230 स्टैंडर्ड का रोल

इस पहल के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क नए AIS-230 ऑटोमोटिव स्टैंडर्ड द्वारा तय किया गया है। यह सिस्टम 5.875 GHz–5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करेगा, जिसे जून 2026 में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस द्वारा लाइसेंस-फ्री घोषित किया गया था। यह टेक्नोलॉजी गाड़ियों को स्पीड, डायरेक्शन और ब्रेकिंग स्टेटस जैसे ज़रूरी रियल-टाइम डेटा वायरलेस तरीके से एक्सचेंज करने में सक्षम बनाएगी। इसका मकसद ड्राइवरों को सीधे नज़र न आने वाले खतरों, जैसे अचानक टक्कर या ब्लाइंड कॉर्नर के पास आते इमरजेंसी वाहनों के बारे में आगाह करना है।

ऑटोमोटिव सेक्टर पर असर

भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए, यह रेगुलेटरी बदलाव एक ज़्यादा कनेक्टेड ट्रांसपोर्ट इकोसिस्टम की ओर एक कदम है। हालांकि यह टेक्नोलॉजी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी मौजूदा सेफ्टी फीचर्स को कॉम्प्लीमेंट करेगी, लेकिन इसमें मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विचार शामिल हैं। ऑटोमेकर्स को सभी नई प्रोडक्शन मॉडलों में स्पेशलाइज्ड ऑन-बोर्ड यूनिट्स (OBUs) को इंस्टॉल करना होगा। इस प्रक्रिया में नए कंपोनेंट्स के लिए सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स को मैनेज करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि टेक्नोलॉजी मजबूत और सुरक्षित हो।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

निवेशकों को प्रोडक्शन कॉस्ट और व्हीकल प्राइसिंग पर पड़ने वाले असर पर विचार करना चाहिए। हालांकि अनिवार्य डेडलाइन तक तीन साल का समय मैन्युफैक्चरर्स को रिसर्च, डेवलपमेंट और इंटीग्रेशन को मैनेज करने के लिए बफर प्रदान करता है, लेकिन अतिरिक्त हार्डवेयर कॉस्ट वाहनों की फाइनल प्राइस को प्रभावित कर सकती है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव एंट्री-लेवल सेगमेंट्स में। इस पहल की सफलता सड़क पर कनेक्टेड वाहनों की एक महत्वपूर्ण संख्या प्राप्त करने पर भी निर्भर करती है, क्योंकि V2V के सुरक्षा लाभ काफी बढ़ जाते हैं जब ज़्यादातर वाहन एक-दूसरे के साथ कम्युनिकेट कर सकते हों।

अन्य जोखिम और भविष्य की राह

इम्प्लीमेंटेशन कॉस्ट के अलावा, अन्य जोखिमों में डेटा प्राइवेसी से जुड़ी साइबर सुरक्षा चिंताएं और विभिन्न वाहन ब्रांडों और कैटेगरी के बीच इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करने की तकनीकी चुनौतियां शामिल हो सकती हैं। यह प्रस्ताव वर्तमान में 30-दिन की पब्लिक कंसल्टेशन के लिए खुला है, ऐसे में इंडस्ट्री अंतिम आवश्यकताओं में किसी भी बदलाव पर नज़र रखेगी। हितधारकों के लिए अगला महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल फाइनल नोटिफिकेशन का जारी होना और प्रमुख ऑटोमेकर्स द्वारा नए सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुरूप अपनी तैयारी और कैपिटल एक्सपेंडिचर योजनाओं के बारे में कोई भी घोषणा होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.