भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में **472.75 मिलियन टन** कार्गो हैंडल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **8.01%** अधिक है। इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से पेट्रोलियम और कंटेनर शिपमेंट की मजबूत मांग रही है।
इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के समुद्री गेटवे ने ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि, यह ग्रोथ हर सेक्टर में एक समान नहीं रही है।
किन चीजों से मिली रफ्तार?
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी भूमिका पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स (POL) के साथ कंटेनर कार्गो की रही। कंटेनर ट्रैफिक में टन के हिसाब से 8.21% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि TEUs (Twenty-Foot Equivalent Units) के वॉल्यूम में 12% से ज्यादा का उछाल देखा गया। इसके अलावा, आयरन ओर और कोल ने भी अच्छा योगदान दिया, जिनमें क्रमशः 7.25% और 5.78% की वृद्धि हुई।
पोर्ट्स का मिला-जुला हाल
गुजरात का Deendayal Port इस बार स्टार परफॉर्मर रहा, जिसने कुल 26.85% की ग्रोथ हासिल की। इसकी बड़ी वजह POL हैंडलिंग में 42.97% का भारी उछाल है। दूसरी ओर, Paradip Port और Chennai Port ने निराश किया है, जहां वॉल्यूम में क्रमशः 1.06% और 4% की गिरावट आई है।
फर्टिलाइजर सेक्टर में सुस्ती
एक चिंताजनक बात फर्टिलाइजर सेगमेंट में देखने को मिली है, जहां 26.89% की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 4 मिलियन टन पर आ गया है। यह डेटा देश की बदलती लॉजिस्टिक रणनीतियों और आयात की जरूरतों की ओर इशारा करता है।
आगे की राह
पोर्ट सेक्टर के लिए आने वाला समय ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितताओं से घिरा हो सकता है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण शिपिंग रूट और फ्यूल कॉस्ट पर असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या संघर्ष कर रहे पोर्ट्स दूसरी छमाही में वापसी कर पाते हैं या नहीं।
