भारत का बड़ा कदम: रूस से तेल आयात जारी रखने के लिए 11 इंश्योरेंस कंपनियों को मिली हरी झंडी, जानें वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का बड़ा कदम: रूस से तेल आयात जारी रखने के लिए 11 इंश्योरेंस कंपनियों को मिली हरी झंडी, जानें वजह
Overview

भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए रूसी तेल टैंकरों का बीमा करने वाली 11 रूसी कंपनियों को हरी झंडी दे दी है। यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं और रूस पर लगे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

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ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का बड़ा कदम

वैश्विक ऊर्जा बाजार में चल रही उठापटक और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम शिपिंग रूट्स पर आ रही दिक्कतों के बीच, भारत ने बड़ा कदम उठाया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (Directorate General of Shipping) ने रूसी तेल टैंकरों का बीमा करने वाली रूसी कंपनियों की संख्या को 8 से बढ़ाकर 11 कर दिया है। यह फैसला रूस से आने वाले कच्चे तेल (Crude Oil) के निर्बाध आयात को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रूस पर बढ़ती भारत की निर्भरता

दरअसल, भारत की रूस पर तेल निर्भरता काफी बढ़ गई है। यूक्रेन युद्ध के बाद से, 2024 में भारत के कुल तेल आयात (Oil Imports) में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 37% तक पहुंच गई है, जो 2022 से पहले 1% से भी कम थी। इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में बढ़ी हुई अनिश्चितता के कारण बीमा प्रीमियम 60% तक चढ़ गया है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते अक्सर रूसी कार्गो का बीमा करने से बचने वाले P&I क्लबों की जगह अब ये रूसी इंश्योरर्स भारतीय पोर्ट्स तक तेल पहुंचाने के लिए जरूरी दस्तावेज मुहैया कराएंगे।

घरेलू बीमा को भी मिल रहा बढ़ावा

भारत सिर्फ रूसी तेल आयात को आसान ही नहीं बना रहा, बल्कि अपने घरेलू समुद्री बीमा क्षेत्र को भी मजबूत कर रहा है। 'इंडिया क्लब' (India Club) और हाल ही में मंजूर हुए 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल' (Bharat Maritime Insurance Pool) जैसी पहलों को ₹12,980 करोड़ की सरकारी गारंटी (Sovereign Guarantee) मिली है। इसका मकसद भारतीय व्यापार को अंतरराष्ट्रीय बीमा बाजारों की अनिश्चितताओं से बचाना है।

रूसी इंश्योरर्स से जुड़े जोखिम

हालांकि, इस कदम से जुड़े कुछ जोखिम भी हैं। ये रूसी कंपनियां इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ P&I क्लब्स (International Group of P&I Clubs) का हिस्सा नहीं हैं, जो दुनिया के अधिकांश टैंकर बेड़े का बीमा करते हैं। ऐसे में, बड़े हादसों, जैसे तेल रिसाव (Oil Spill) की स्थिति में क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlement) की प्रक्रिया अलग हो सकती है और वित्तीय सहायता पश्चिमी कंपनियों की तुलना में कम मजबूत हो सकती है। इन कंपनियों को रूस की सरकारी नेशनल रीइंश्योरेंस कंपनी (Russian National Reinsurance Company) का समर्थन हासिल है, जो बीमा को सीधे रूसी सरकार से जोड़ता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, Ingosstrakh जैसी कंपनियां 'सैंक्शन एक्सक्लूजन क्लॉज' (Sanction Exclusion Clause) भी शामिल कर सकती हैं, जिससे प्रतिबंधों के उल्लंघन पर पॉलिसी अमान्य हो सकती है। रूस के 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) का बढ़ता इस्तेमाल, जो संदिग्ध या बिना बीमा के चल रहे हैं, पर्यावरण और देनदारी के जोखिम को बढ़ाता है।

ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक रणनीति

रूसी बीमा कंपनियों के लिए दरवाजे खोलना और साथ ही घरेलू बीमा क्षमता का निर्माण करना, यह दर्शाता है कि भारत पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम करते हुए अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्वतंत्र रूप से सुरक्षित करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति (Long-term Strategy) पर काम कर रहा है। जब तक भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा और वैश्विक शिपिंग मार्ग कमजोर रहेंगे, वैकल्पिक बीमा समाधानों की मांग बढ़ती रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.