UDAN: अगले दशक में क्षेत्रीय हवाई सफर का नया दौर
भारत सरकार की ओर से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम (RCS)–UDAN को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। अगले 10 सालों (FY27-FY36) में ₹28,840 करोड़ का निवेश करके करीब 100 नए हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा, जो खासकर छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) को बड़े शहरों से जोड़ेंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ़ यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास, व्यापार, पर्यटन को बढ़ावा देना और दूरदराज के इलाकों में आपातकालीन सेवाओं व स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को बेहतर बनाना है। इस योजना का एक अहम हिस्सा ₹10,043 करोड़ का वॉयबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) है, जो अगले 10 सालों तक एयरलाइन ऑपरेटर्स को कम इस्तेमाल होने वाले रूट्स पर सेवाएँ बनाए रखने में मदद करेगा। इन नए रीजनल एयरपोर्ट्स के विकास पर हर एयरपोर्ट के लिए करीब ₹100 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।
सीमा सुरक्षा हुई और मज़बूत: IVFRT सिस्टम का होगा आधुनिकीकरण
नागरिक उड्डयन के साथ-साथ, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मज़बूत करने की तैयारी कर ली है। इमिग्रेशन, वीज़ा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन और ट्रैकिंग (IVFRT) स्कीम को अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक, यानी अगले 5 सालों के लिए बढ़ाया गया है। इसके लिए ₹1,800 करोड़ का बजट तय किया गया है, जिसका इस्तेमाल सिस्टम के टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और सेवाओं को बेहतर बनाने में होगा। नए IVFRT सिस्टम में मोबाइल सेवाओं और सेल्फ-सर्विस कियोस्क जैसी नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा, ताकि यात्रियों की आवाजाही और भी ज़्यादा सहज और सुरक्षित हो सके। इमिग्रेशन पोस्ट्स और डेटा सेंटर्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी आधुनिक बनाया जाएगा और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। IVFRT ने पहले ही वीज़ा प्रोसेसिंग में काफी तेज़ी लाई है, जहाँ 91% से ज़्यादा ई-वीज़ा एप्लीकेशन 72 घंटों के अंदर प्रोसेस हो जाती हैं और इमिग्रेशन क्लीयरेंस का औसत समय घटकर लगभग 2.5 से 3 मिनट हो गया है।
UDAN के सामने चुनौतियाँ: क्या सब्सिडी पर निर्भरता कम होगी?
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों के बावजूद, UDAN मॉडल की दीर्घकालिक सफलता पर सवाल बने हुए हैं। पिछले अनुभवों से पता चला है कि सब्सिडी खत्म होने के बाद कई रूट्स पर एयरलाइंस के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल हो जाता है। हालाँकि 619 से ज़्यादा रूट्स सक्रिय हैं और 88 एयरपोर्ट्स को जोड़ा गया है, लेकिन सब्सिडी का असर खत्म होने पर निरंतरता एक चिंता का विषय है। भारत का एविएशन सेक्टर भी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। FY2026 में इंडस्ट्री को ₹170-₹180 बिलियन के घाटे का अनुमान है, जिसकी वजह धीमी यात्री वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये का कमज़ोर होना और विमानों की उपलब्धता में सप्लाई चेन की समस्याएँ हैं। ईंधन की लागत एयरलाइंस के खर्च का 30-40% बनी हुई है।
रीजनल रूट्स की व्यवहार्यता पर सवाल
UDAN स्कीम के लिए ₹10,043 करोड़ की भारी VGF की मंज़ूरी, रीजनल रूट्स के पीछे की वित्तीय कठिनाइयों को दर्शाती है। स्कीम के पिछले फेज़ों में VGF पेमेंट्स में देरी ने एयरलाइंस को आर्थिक दबाव में डाला था। इसके अलावा, कुछ रूट्स पर कम यात्री मांग के कारण उन्हें बंद करना पड़ा। Alliance Air को FY23-24 में ₹619.56 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ, जो सपोर्ट मिलने के बावजूद रीजनल एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव को दिखाता है। पवन हंस को भी अपने बेड़े को अपग्रेड करने के लिए बड़े फंड की ज़रूरत है, क्योंकि उसके हेलीकॉप्टरों की औसत उम्र 20 साल से ज़्यादा है। UDAN की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह एक ऐसा माहौल बना पाता है जहाँ एयरलाइंस बिना लगातार सब्सिडी पर निर्भर हुए लाभ कमा सकें।
भविष्य का नज़रिया: विकास और स्थिरता के बीच संतुलन
सेक्टर की चुनौतियों के बावजूद, भारत के एविएशन उद्योग में लंबी अवधि में बड़ी वृद्धि की उम्मीद है, यात्री यातायात 2030 तक दोगुना होने का अनुमान है। 2014 में 74 एयरपोर्ट्स से बढ़कर 2025 में 164 एयरपोर्ट्स चालू हो गए हैं। UDAN के ज़रिए रीजनल कनेक्टिविटी में और IVFRT के ज़रिए उन्नत बॉर्डर मैनेजमेंट में सरकार का निरंतर निवेश, एक ज़्यादा जुड़े हुए भारत की रणनीति को दर्शाता है। हालाँकि, UDAN स्कीम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह वास्तविक बाज़ार की मांग कैसे पैदा करती है, परिचालन दक्षता कैसे सुधारती है, एयरलाइंस की सब्सिडी पर निर्भरता कैसे कम करती है और सेक्टर के वित्तीय जोखिमों व इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को कैसे प्रबंधित करती है।