भारत और साउथ कोरिया की दिग्गज कंपनी HD Hyundai ने तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक विशाल कमर्शियल शिपयार्ड बनाने का फैसला किया है। इस **$4 बिलियन** के मेगा प्रोजेक्ट का लक्ष्य सालाना **2.5 मिलियन ग्रॉस टनेज** की क्षमता हासिल करना है।
भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज ने साउथ कोरिया की HD Hyundai के साथ हाथ मिलाया है। इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का मकसद भारत को कमर्शियल शिपबिल्डिंग के ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करना है। दोनों पक्षों ने एक 'जॉइंट वर्किंग ग्रुप' बनाया है, जो अगले 6 महीनों के भीतर इसका पूरा ब्लू प्रिंट और टेक्निकल ढांचा तैयार करेगा।
क्या है मास्टर प्लान?
यह पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार की 'शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम' के तहत काम करेगा। एक बार यह शिपयार्ड पूरी तरह चालू हो जाता है, तो इसकी क्षमता 2.5 मिलियन ग्रॉस टनेज तक पहुँचने की उम्मीद है। इससे न केवल भारत की मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगी, बल्कि कोरियाई तकनीक के साथ स्थानीय इंजीनियरिंग का भी संगम देखने को मिलेगा।
मार्केट और निवेशकों के लिए संकेत
फिलहाल घरेलू मार्केट में Cochin Shipyard, Mazagon Dock Shipbuilders और Garden Reach Shipbuilders जैसी सरकारी कंपनियां रक्षा और नौसेना की जरूरतों पर फोकस करती हैं। ऐसे में यह कमर्शियल शिपयार्ड एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह प्रोजेक्ट न केवल इंपोर्ट कॉस्ट घटाएगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स को भी रफ्तार देगा।
सावधानी भी है जरूरी
निवेशकों को याद रखना चाहिए कि यह एक कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट है और इसका रिटर्न मिलने में लंबा समय (Gestation Period) लग सकता है। जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition), पर्यावरणीय मंजूरी और कुशल वर्कफोर्स की उपलब्धता जैसे जोखिम अभी भी बरकरार हैं। निर्माण के दौरान अगर देरी या कॉस्ट ओवररन होता है, तो कंपनियों की बैलेंस शीट पर इसका असर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब अगले 6 महीनों तक इस प्रोजेक्ट की वायबिलिटी और फंडिंग मॉडल पर बारीकी से नजर रखेंगे।
