भारत का बड़ा ऐलान! EV चार्जिंग और मैन्युफैक्चरिंग को ₹503 करोड़ का बूस्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई उड़ान

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत का बड़ा ऐलान! EV चार्जिंग और मैन्युफैक्चरिंग को ₹503 करोड़ का बूस्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई उड़ान
Overview

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। देश भर में **4,874** नए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए **₹503.86 करोड़** की मंजूरी दी गई है।

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चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

सरकार ने ₹503.86 करोड़ का फंड जारी किया है, जिससे देश भर में 4,874 नए EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसमें कर्नाटक को ₹123.26 करोड़ मिले हैं, जिसके तहत वहां 1,243 नए चार्जर लगाए जाएंगे। यह पहल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति तेज करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।

दो-तरफा रणनीति: इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग की ताकत

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ, सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी भारी बढ़ावा दे रही है। एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए ₹18,100 करोड़, EVs और क्लीनर वाहनों के लिए PLI ऑटो स्कीम में ₹25,938 करोड़, और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के लिए ₹7,280 करोड़ की नई स्कीम का लक्ष्य भारत को इन अहम क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना है। इस संयुक्त रणनीति से बैटरी प्रोडक्शन से लेकर व्हीकल असेंबली और चार्जिंग तक का पूरा EV इकोसिस्टम तैयार होगा।

बाजार की ग्रोथ का अनुमान

इन प्रयासों से भारतीय EV मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। अनुमान है कि यह मार्केट 2025 में लगभग USD 18.79 बिलियन से बढ़कर 2035 तक USD 1,283 बिलियन से अधिक हो जाएगा, जो कि 52.56% के सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगा।

यूजर एक्सपीरियंस को आसान बनाना: यूनिफाइड चार्जिंग ऐप

यूजर्स के लिए चार्जिंग को आसान बनाने हेतु, भारत जल्द ही 'यूनिफाइड भारत ई-चार्ज' (Unified Bharat e-Charge - UBC) ऐप लॉन्च करेगा। BHEL और NPCI के सहयोग से विकसित यह नेशनल ऐप, यूजर्स को एक ही इंटरफेस से विभिन्न नेटवर्क्स पर चार्जिंग स्टेशन ढूंढने, बुक करने और भुगतान करने की सुविधा देगा। इसका लक्ष्य डिजिटल पेमेंट्स में UPI की सफलता को दोहराना है।

सेक्टर पर असर और भविष्य की ओर

HPCL, IOCL, और BPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ पहले से ही हजारों चार्जर लगाकर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। शहरों और ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग स्टेशन लगाने में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। भारत के GDP और रोजगार में बड़ा योगदान देने वाला ऑटो सेक्टर इस EV पुश का केंद्र है, जिससे भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर अग्रसर है।

EV अपनाने की राह की चुनौतियाँ

हालांकि, सरकारी मदद के बावजूद EV अपनाने की राह में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। EV के बढ़ते इस्तेमाल से ग्रिड की स्थिरता पर दबाव पड़ सकता है। चार्जिंग के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ने से बचना होगा। PLI स्कीम्स के बावजूद, बैटरी सेल और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे आयातित पुर्जों से जोखिम बना हुआ है। पेट्रोल कारों की तुलना में EVs की शुरुआती ऊंची कीमत भी भारतीय खरीदारों के लिए एक बाधा है। सुदूर इलाकों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समान वितरण भी एक चुनौती है। कुछ हाई-वैल्यू EV कंपोनेंट्स के लोकल प्रोडक्शन में देरी लंबी अवधि की लागत और आत्मनिर्भरता को प्रभावित कर सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.