फ्लाइट रूट बदले, अब डोमेस्टिक टिकट पर लगेगा सरचार्ज
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता के कारण भारतीय एयरलाइंस को अपनी फ्लाइट्स के रूट बदलने पड़ रहे हैं और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बढ़ गई हैं। इन हालात से निपटने के लिए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस वेस्ट एशिया के लिए अपनी फ्लाइट्स की संख्या बढ़ा रही हैं। 11 मार्च 2026 को इन डेस्टिनेशन्स के लिए 58 फ्लाइट्स शेड्यूल की गई थीं, जिनमें जेद्दाह, मस्कट और UAE शामिल हैं। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) इस स्थिति को संभालने में मदद कर रहा है, जिसमें अराइवल और डिपार्चर स्लॉट को मैनेज करना और UAE व सऊदी अरब के लिए वैकल्पिक रूट हब के तौर पर मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नामित करना शामिल है। IndiGo और SpiceJet जैसी अन्य एयरलाइंस भी एयरस्पेस प्रतिबंधों को मैनेज करने और ऑपरेशंस बनाए रखने के लिए अपने नेटवर्क में बदलाव कर रही हैं।
क्यों हुआ फ्यूल सरचार्ज लागू?
भू-राजनीतिक स्थिति के चलते एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35-40% होता है। इन बढ़ती लागतों की भरपाई के लिए, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 मार्च 2026 से बुक होने वाली सभी नई डोमेस्टिक टिकटों पर ₹399 का फ्यूल सरचार्ज जोड़ेगी। यह सरचार्ज डोमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट पर लागू होने वाली योजनाओं का हिस्सा है, जो एयरलाइन के मुनाफे पर लगातार पड़ रहे दबाव को दिखाता है। इसी तरह की भू-राजनीतिक टेंशन के चलते मार्च 2026 की शुरुआत में ATF की कीमतों में बढ़ोतरी के डर से भारतीय एयरलाइंस के शेयरों में भारी गिरावट आई थी।
IndiGo की मजबूती और SpiceJet की मुश्किलें
भारत की प्रमुख एयरलाइंस की फाइनेंशियल हेल्थ और मार्केट आउटलुक में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन InterGlobe Aviation (IndiGo) के लिए 25 एनालिस्ट्स ने 'Buy' रेटिंग दी है और उनका औसतन 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹5,732.80 है। हालांकि, FY26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 78% घटकर ₹550 करोड़ रह गया। इसका हाई प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो भविष्य में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद दिखाता है, और कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹1.87 लाख करोड़ है। IndiGo को दिसंबर 2025 में बड़े ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस का सामना करना पड़ा था, जिससे हजारों फ्लाइट्स लेट हुईं। इसके CEO, Pieter Elbers ने 11 मार्च 2026 को व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद फाउंडर Rahul Bhatia अंतरिम CEO का पद संभालेंगे।
इसके विपरीत, SpiceJet गंभीर फाइनेंशियल दिक्कतों से जूझ रही है। 11 मार्च 2026 को शेयर का भाव लगभग ₹13.66 पर कारोबार कर रहा था। एनालिस्ट्स ने इसे 'Sell' रेटिंग दी है और MarketsMojo ने वीक फंडामेंटल्स, निगेटिव बुक वैल्यू और घटती सेल्स को देखते हुए 'Strong Sell' रेटिंग दी है। इसका निगेटिव P/E रेशियो लगातार घाटे को दर्शाता है, जबकि मार्केट कैप लगभग ₹2,000 करोड़ है। एयरलाइन ग्राउंडेड विमानों से जूझ रही है और FY26 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में ₹621 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था।
ऐतिहासिक संकेत और मैक्रो इकोनॉमिक दबाव
मिडिल ईस्ट में पिछली भू-राजनीतिक अस्थिरता का भारतीय एविएशन स्टॉक्स पर सीधा असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, 2 मार्च 2026 के आसपास, बढ़ते संघर्ष के बाद एयरलाइन शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिसमें InterGlobe Aviation 6.25% और SpiceJet 5.72% गिरा था। क्रूड ऑयल की कीमतों के प्रति सेक्टर की संवेदनशीलता एक लगातार कमजोरी बनी हुई है। मार्च 2026 की शुरुआत में $110 प्रति बैरल से ऊपर क्रूड ऑयल में उछाल आने से एयरलाइन शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिसमें InterGlobe Aviation 8% तक गिर गया था। इसके विपरीत, 10 मार्च 2026 को तनाव कम होने की उम्मीदों पर तेल की कीमतों में गिरावट आने से IndiGo और SpiceJet के शेयरों में 8% तक की तेजी आई थी।
भारत का एविएशन सेक्टर, जिसके 2030 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बनने की उम्मीद है, मिडिल ईस्ट के एयर कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है, जो इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रैफिक के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां और जोखिम
SpiceJet की खराब फाइनेंशियल स्थिति भारतीय एविएशन सेक्टर में सबसे बड़ा जोखिम पेश करती है। निगेटिव बुक वैल्यू, लगातार घटती सेल्स और भारी कर्ज के साथ, यह एयरलाइन अत्यधिक लीवरेज्ड है और इसे बड़े ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। MarketsMojo की 'Strong Sell' रेटिंग निगेटिव टेक्निकल इंडिकेटर्स और निकट भविष्य में रिकवरी की उम्मीदों की कमी का नतीजा है। IndiGo के लिए, एनालिस्ट सेंटीमेंट पॉजिटिव होने के बावजूद, इसका हाई P/E रेशियो बताता है कि इन्वेस्टर्स भविष्य में काफी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इस ग्रोथ को यील्ड ग्रोथ में संभावित मंदी, लगातार ऑपरेशनल जटिलताओं और अस्थिर फ्यूल कीमतों से चुनौती मिल सकती है। कंपनी के हालिया प्रॉफिट में गिरावट और पिछली बड़ी रुकावटें, फ्लीट के आधुनिकीकरण के बावजूद, सेक्टर-वाइड कॉस्ट प्रेशर और डिमांड में उतार-चढ़ाव के प्रति इसके एक्सपोजर को उजागर करती हैं। लगातार बनी रहने वाली भू-राजनीतिक टेंशन से सेक्टर के नेट लॉस बढ़ सकते हैं, जैसा कि FY2025-26 के लिए अनुमान लगाया गया है।