मिडिल ईस्ट के तनाव का एविएशन पर गहरा असर
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tension) भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रहा है। EY India के अनुसार, यह क्षेत्र ग्लोबल जेट फ्यूल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की किसी भी अस्थिरता का सीधा असर भारतीय एयरलाइन्स पर पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए ऑपरेशंस को अधिक अनुकूल (adaptable) और विविध (diverse) बनाने की जरूरत है।
फ्यूल की कीमतें आसमान पर, एयरलाइन्स परेशान
संघर्षों और प्रमुख शिपिंग रूट्स के बंद होने के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जो ग्लोबल एवरेज को 195 डॉलर प्रति बैरल के पार ले गया है। यह बढ़ोतरी एयरलाइन्स के लिए सीधा झटका है, क्योंकि फ्यूल उनके कुल खर्च का 40-50% होता है। उदाहरण के तौर पर, IndiGo की हाई मार्केट वैल्यूएशन इन बढ़ती लागतों से खतरे में पड़ सकती है। वहीं, SpiceJet जैसी कंपनियां पहले से ही निगेटिव P/E रेशियो के साथ वित्तीय दिक्कतों का सामना कर रही हैं। इंडस्ट्री का मानना है कि मौजूदा हालात एयरलाइन्स के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल बना सकते हैं।
बदले रूट से बढ़ा खर्च, समय भी ज्यादा
मिडिल ईस्ट के कई एयरस्पेस बंद होने की वजह से एयरलाइन्स को फ्लाइट रूट्स बदलने पड़ रहे हैं, जिससे लोकप्रिय इंटरनेशनल रूट्स पर यात्रा की दूरी 15% तक बढ़ गई है। इसका सीधा मतलब है ज्यादा फ्यूल की खपत, क्रू की बढ़ी हुई लागत और ऑपरेशनल जटिलताएं। यूरोप जाने वाली भारतीय एयरलाइन्स की फ्लाइट्स का समय काफी बढ़ गया है, क्योंकि वे कुछ एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं, जिससे उन्हें अपने यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, वॉर-रिस्क इंश्योरेंस की लागत भी काफी बढ़ गई है, जिसका कुछ बोझ यात्रियों पर भी डाला जा सकता है।
एयरपोर्ट्स के राजस्व पर भी अनिश्चितता
यात्रियों के ट्रैफिक में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित फ्लाइट शेड्यूल से एयरपोर्ट्स पर भी असर पड़ रहा है। एयरपोर्ट के मुनाफे के लिए अहम नॉन-एयरलाइन सर्विसेज (जैसे रिटेल, फूड) से होने वाला रेवेन्यू भी यात्रियों की संख्या पर निर्भर करता है।
इंडस्ट्री आउटलुक 'नेगेटिव'
रेटिंग एजेंसी ICRA ने भू-राजनीतिक मुद्दों, करेंसी में उतार-चढ़ाव और बढ़ती जेट फ्यूल कीमतों को प्रमुख चिंताओं के तौर पर देखते हुए भारतीय एविएशन इंडस्ट्री का आउटलुक 'नेगेटिव' कर दिया है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि लागत में यह तेज बढ़ोतरी आने वाली तिमाहियों में एयरलाइन्स के प्रॉफिट को कम कर सकती है। कई भारतीय एयरलाइन्स के पास फ्यूल हेजिंग (hedging) जैसी रणनीतियों के लिए कम वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी होती है।
रेजिलिएंस (Resilience) के लिए रणनीतियाँ
EY का सुझाव है कि इंडस्ट्री को विभिन्न परिदृश्यों के लिए तैयार रहना चाहिए और कार्गो ऑपरेशंस जैसे नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स (streams) तलाशने चाहिए। टेक्नोलॉजी में निवेश और ऑपरेशनल रेजिलिएंस (resilience) को बढ़ाना महत्वपूर्ण है। सरकार ने घरेलू फ्यूल कीमतों में नरमी लाकर और कुछ फ्लाइट रेगुलेशन को आसान बनाकर घरेलू बाजार को सपोर्ट करने के कदम उठाए हैं। हालांकि, लंबी अवधि में सफलता स्ट्रैटेजिक प्लानिंग और बदलते वैश्विक हालात के अनुकूल ढलने पर निर्भर करेगी।