श्रीलंका के एयरपोर्ट पर भारत की नज़र! चीन को टक्कर देने की बड़ी चाल?

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
श्रीलंका के एयरपोर्ट पर भारत की नज़र! चीन को टक्कर देने की बड़ी चाल?
Overview

श्रीलंका अपने कम इस्तेमाल होने वाले मैटला राजपक्ष इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MRIA) के लिए **30 साल** के पट्टे (Lease) हेतु बोलियां (Bids) आमंत्रित कर रहा है। भारत इस मौके को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पहुंच का विस्तार करने और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एक बड़ी रणनीतिक चाल के तौर पर देख रहा है।

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श्रीलंका का 'खाली' एयरपोर्ट, भारत के लिए बना रणनीतिक मौका

श्रीलंका ने अपने मैटला राजपक्ष इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MRIA) को 30 साल के बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत लीज पर देने का फैसला किया है। यह कदम भारत के लिए एक बड़ा भू-राजनीतिक मौका लेकर आया है, जिससे वह उस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकता है जहाँ चीन का प्रभाव काफी ज़्यादा है, खासकर चीन द्वारा नियंत्रित हंबनटोटा पोर्ट के पास।

भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और चीन को काउंटर करने की रणनीति

9 जून तक के लिए खोली गई बोलियों (Bids) में भारत की खास दिलचस्पी है। यह एयरपोर्ट, जो 2013 में शुरू हुआ था और $209 मिलियन (जिसका बड़ा हिस्सा चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने फाइनेंस किया था) की लागत से बना, यात्री यातायात की कमी के चलते घाटे में चल रहा है। इसे अक्सर 'दुनिया का सबसे खाली एयरपोर्ट' भी कहा जाता है।

अब 30 साल की BOT लीज के तहत, यह भारतीय कंपनियों के लिए एक संभावित प्रवेश द्वार बन सकता है। भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए, यह कदम चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव का सीधा मुकाबला करेगा।

भारत के एविएशन सेक्टर के लिए एमआरओ और पायलट ट्रेनिंग का अवसर

भारत के अपने एविएशन सेक्टर, जो दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है, को मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेवाओं और पायलट ट्रेनिंग में क्षमता की कमी का सामना करना पड़ रहा है। MRIA के लंबे रनवे और खुला एयरस्पेस भारतीय एयरलाइंस के लिए लागत और समय बचाने वाला एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, एयरपोर्ट के आसपास 238 हेक्टेयर ज़मीन पर लैंडसाइड डेवलपमेंट (Landside Development) की भी संभावना है, जिसमें लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक पार्क और अन्य विकास कार्य शामिल हो सकते हैं।

जोखिम और चुनौतियाँ

हालांकि, MRIA को एक सफल हवाई अड्डे में बदलना एक बड़ी चुनौती है। इसकी लोकेशन और अतीत की खराब व्यावसायिक प्रदर्शन (Commercial Performance) इसे बड़ी बाधाएँ हैं। श्रीलंका में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के इतिहास में पारदर्शिता और निष्पक्षता अहम होगी, खासकर हंबनटोटा पोर्ट के चीन के साथ हुए कर्ज-बनाम-इक्विटी स्वैप (Debt-for-equity swap) को देखते हुए। अतीत में, एक इंडो-रूसी संयुक्त उद्यम (Joint Venture) भी राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण यहां लीज हासिल करने में विफल रहा था। एडानी एयरपोर्ट्स जैसी अनुभवी कंपनियों के लिए भी, MRIA की अलग-थलग लोकेशन और पिछली विफलताएं महत्वपूर्ण परिचालन जोखिम (Operational Risks) पेश करती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.