भारत के डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक में अगस्त महीने के दौरान साल-दर-साल **7.5%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पैसेंजर लोड फैक्टर के **78.7%** पर आने से एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
डिमांड में लगातार गिरावट
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय एविएशन मार्केट में अगस्त का महीना काफी सुस्त रहा। रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर (RPK) के आधार पर देखें तो यह लगातार दूसरा महीना है जब ट्रैफिक गिरा है, इससे पहले जुलाई में भी इसमें 5.2% की गिरावट देखी गई थी।
लोड फैक्टर का गणित
एयरलाइंस ने अगस्त में अपनी सीट कैपेसिटी में 1.2% की कटौती की थी, लेकिन यात्रियों की संख्या में आई भारी गिरावट के सामने यह काफी नहीं थी। नतीजतन, पैसेंजर लोड फैक्टर गिरकर 78.7% रह गया। IATA द्वारा ट्रैक किए जाने वाले दुनिया के 6 प्रमुख डोमेस्टिक मार्केट में यह सबसे निचला स्तर है।
निवेशकों के लिए जोखिम
एविएशन सेक्टर में फिक्स्ड कॉस्ट (Fixed Costs) काफी ज्यादा होती है—जैसे कि एयरक्राफ्ट लीज, मेंटेनेंस और एयरपोर्ट चार्ज। जब ट्रैफिक गिरता है, तो एयरलाइंस के लिए इन खर्चों को कम करना मुश्किल होता है। InterGlobe Aviation जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए गिरता हुआ लोड फैक्टर ऑपरेटिंग मार्जिन को नुकसान पहुँचा सकता है।
अब आगे क्या?
ग्लोबल मार्केट में भी डिमांड ठंडी पड़ी है, जहाँ RPK में 0.8% की कमी आई है। महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण आम लोगों के ट्रैवल बजट पर असर पड़ा है। अब पूरी इंडस्ट्री की नजरें त्योहारी सीजन (Festive Season) पर टिकी हैं। एयरलाइंस ने अक्टूबर में अपनी कैपेसिटी 2% बढ़ाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि क्या डिमांड में रिकवरी आती है या फिर कंपनियों को मुनाफे के लिए आक्रामक प्राइसिंग वॉर (Pricing War) का सहारा लेना पड़ेगा।
