Dedicated Freight Corridor: भारत ने पूरा किया 2,843 किमी का मेगा प्रोजेक्ट, लॉजिस्टिक्स लागत में आएगी भारी कमी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Dedicated Freight Corridor: भारत ने पूरा किया 2,843 किमी का मेगा प्रोजेक्ट, लॉजिस्टिक्स लागत में आएगी भारी कमी

भारत ने अपने 2,843 किमी लंबे Dedicated Freight Corridor (DFC) नेटवर्क को पूरी तरह से चालू कर दिया है। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के अलग होने से न केवल माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी बड़ी गिरावट आएगी। निवेशक अब इस **₹1.24 लाख करोड़** के बड़े निवेश के रिटर्न पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं।

भारत ने सितंबर 2026 में अपने 2,843 किमी लंबे Dedicated Freight Corridor (DFC) नेटवर्क के काम को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited (DFCCIL) द्वारा निष्पादित इस प्रोजेक्ट ने देश के प्रमुख औद्योगिक हब और बंदरगाहों को आपस में जोड़ दिया है। इसमें 1,506 किमी लंबा Western Dedicated Freight Corridor (WDFC) जो दादरी से JNPT तक फैला है, और 1,337 किमी लंबा Eastern Dedicated Freight Corridor (EDFC) जो न्यू साहनेवाल से न्यू सोननगर तक है, अब पूरी तरह से चालू हो गए हैं।

रेल लॉजिस्टिक्स की रफ्तार में इजाफा

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के दबाव से अलग करना है। पहले हावड़ा-दिल्ली जैसे प्रमुख रूटों पर मालगाड़ियां यात्री ट्रेनों के इंतजार में घंटों खड़ी रहती थीं, जिससे देरी होती थी। अब नई डेडिकेटेड पटरियों पर मालगाड़ियां 50 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार पकड़ सकेंगी। इसके अलावा, डबल-स्टैक कंटेनर ऑपरेशन से एक ही ट्रिप में माल ढुलाई की क्षमता कई गुना बढ़ गई है।

लॉजिस्टिक्स लागत पर क्या होगा असर?

देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह प्रोजेक्ट गेम-चेंजर है। सड़क मार्ग की तुलना में, जहां प्रति टन-किमी खर्च लगभग ₹4 आता है, वहीं रेल द्वारा यह खर्च महज ₹1.96 प्रति टन-किमी है। सरकार का मकसद सड़क से माल को रेल की ओर शिफ्ट करके भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

आगे की राह: लास्ट-माइल इंटीग्रेशन

अब पूरा फोकस 'लास्ट-माइल' कनेक्टिविटी और टर्मिनल इंटीग्रेशन पर है। कंपनियां कितनी तेजी से अपनी फैक्ट्रियों को इस नेटवर्क से जोड़ती हैं, उसी पर असली आर्थिक फायदा निर्भर करेगा। इसके लिए 'गति शक्ति' टर्मिनलों का विकास किया जा रहा है। साथ ही, सरकार ने भविष्य के लिए 2,052 किमी लंबे डंकुनी-सूरत कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे इस नेटवर्क का दायरा और बढ़ेगा। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि कैसे इस ₹1.24 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश का बेहतर संचालन और उपयोग सुनिश्चित किया जाता है।

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