भारत और चीन के बीच शिनजियांग (Xinjiang) के ऊपर से एयर कॉरिडोर खोलने पर बातचीत चल रही है। इसका मुख्य मकसद अप्रैल **2025** के बाद से पाकिस्तानी एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों से जूझ रही भारतीय एयरलाइंस के लिए रास्ता आसान करना है, जिससे ईंधन और ऑपरेशनल खर्चों में बड़ी कटौती की उम्मीद है।
रास्ता बदलने की तैयारी क्यों?
अप्रैल 2025 में पहलगाम घटना के बाद से ही पाकिस्तानी एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों ने भारतीय विमानन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एयरलाइंस को अब अरब सागर के ऊपर से घूमकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे न सिर्फ ईंधन की खपत (Fuel Burn) बढ़ गई है, बल्कि क्रू के ड्यूटी आवर्स भी लंबे हो गए हैं। भारत सरकार अब चीन के साथ मिलकर शिनजियांग, खास तौर पर होटन (Hotan) के ऊपर से एयर ट्रांजिट राइट्स पाने की कोशिश कर रही है, ताकि यूरोप और अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स के लिए रास्ता सीधा हो सके।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
एयरलाइंस के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर खर्च होता है। Air India और IndiGo जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह सीधा-सीधा उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर डालेगा। अगर यह रूट खुलता है, तो न केवल फ्यूल की बचत होगी बल्कि लंबी उड़ानों की एफिशिएंसी भी बढ़ेगी।
डिप्लोमेसी और आगे की राह
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत-चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं, जो इस बातचीत की बुनियाद बना है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि यह अभी शुरुआती दौर है। अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। असल बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि चीन सरकार कौन से रूट और प्रोटोकॉल को मंजूरी देती है। साथ ही, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एयरलाइंस के मुनाफे पर बड़ा असर डालने वाला मुख्य वेरिएबल बना रहेगा।
