India-China Flights Resume: भारत-चीन के बीच उड़े विमान, व्यापारिक रिश्ते सुधरने के संकेत

TRANSPORTATION
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India-China Flights Resume: भारत-चीन के बीच उड़े विमान, व्यापारिक रिश्ते सुधरने के संकेत
Overview

भारत और चीन के बीच वर्षों से बंद पड़े हवाई संपर्क को फिर से बहाल कर दिया गया है। दिल्ली-बीजिंग, कुनमिंग-कोलकाता और कोलकाता-शंघाई के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं, जिससे दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण वायु लिंक फिर से जुड़ गए हैं। यह कदम महामारी और 2020 के सीमा संघर्षों के बाद रिश्तों में आई खटास के बीच आर्थिक संबंधों में नई जान फूंकने का संकेत दे रहा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

बहाल हुआ हवाई संपर्क: अहम रूट्स पर उड़े विमान

एयर चाइना (Air China) ने बीजिंग-दिल्ली सेवा फिर से शुरू कर दी है, जो मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को संचालित होगी। इससे पहले, चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस (China Eastern Airlines) ने 18 अप्रैल को कुनमिंग-कोलकाता रूट और इंडिगो (IndiGo) ने 29 मार्च को कोलकाता-शंघाई सेवाएं फिर से शुरू की थीं। इन उड़ानों के बहाल होने से महत्वपूर्ण हवाई संपर्क फिर से स्थापित हुए हैं, जो कोविड-19 महामारी और 2020 के सीमा संघर्षों के कारण बाधित हो गए थे। अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद व्यापार, पर्यटन और आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, जो रिश्तों को स्थिर करने की मंशा को दर्शाता है।

आर्थिक संबंधों में गर्माहट

हवाई संपर्क की यह बहाली दोनों देशों के बीच गर्म हो रहे आर्थिक संबंधों से गहराई से जुड़ी हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए चीन एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, द्विपक्षीय व्यापार $151.1 बिलियन तक पहुंच गया है। हालांकि, इस दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर $112.16 बिलियन हो गया। मार्च 2026 में, भारत सरकार ने चीन से डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों को आसान बनाया, जिसमें प्रमुख क्षेत्रों में गैर-नियंत्रणकारी हिस्सेदारी के लिए पहले की मंजूरी को हटा दिया गया। इसका उद्देश्य चीनी निवेश को आकर्षित करना और भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना है। 2026 में भारत की आगामी ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता भी सहयोग के जारी रहने का संकेत देती है।

एयरलाइंस की मांग और वित्तीय दबाव

भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो, जो घरेलू बाजार में लगभग 64% हिस्सेदारी रखती है, अपने चीन रूट का विस्तार कर रही है। अप्रैल के आंकड़े इन उड़ानों पर मजबूत मांग दिखा रहे हैं, जिसमें यात्रियों का लोड फैक्टर 68% से 85% के बीच रहा। यह मांग प्रमुख चीनी एयरलाइंस के वित्तीय स्वास्थ्य के विपरीत है। एयर चाइना का बाजार मूल्य $11.6 बिलियन था और अप्रैल 2026 में इसका पी/ई (P/E) रेशियो -44.33 था, जिसे मार्च में जैक्स रिसर्च (Zacks Research) ने 'स्ट्रॉन्ग सेल' रेटिंग दी थी। चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस का पी/ई (P/E) रेशियो भी मार्च 2026 में -50.7 दर्ज किया गया था। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एविएशन सेक्टर में 2026 में 7.3% की वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें भारत और चीन अग्रणी रहेंगे। भारत 2026 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट बनने की ओर अग्रसर है। हालांकि, सप्लाई चेन की मौजूदा दिक्कतें और कर्मचारियों की कमी लोड फैक्टर को बढ़ा रही है, जिससे टिकट की कीमतें बढ़ रही हैं लेकिन विकास सीमित हो रहा है।

द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियां बरकरार

सहयोग के नवीनीकृत संकेतों के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। एयर चाइना और चाइना ईस्टर्न जैसी चीनी सरकारी एयरलाइंस वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रही हैं, बड़े घाटे और नकारात्मक पी/ई (P/E) रेशियो की रिपोर्ट दे रही हैं। विश्लेषकों का एयर चाइना पर 'सेल' रेटिंग का एक आम सहमति है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है, जहां आयात निर्यात से कहीं अधिक है। सीमा विवाद और शक्ति संतुलन जैसी अंतर्निहित समस्याएं, राजनयिक प्रयासों के बावजूद बनी हुई हैं। वैश्विक एविएशन सेक्टर भी सप्लाई चेन की समस्याओं, कर्मचारियों की कमी और संघर्षों के आर्थिक प्रभावों से जूझ रहा है। भारत का चीनी निर्मित पार्ट्स और सप्लाई चेन पर निर्भरता एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है, भले ही वह विविधता लाने की कोशिश कर रहा हो।

भविष्य का दृष्टिकोण: जटिलताओं के बीच विकास

विश्लेषकों को 2026 तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यात्री यातायात में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें भारत और चीन आगे रहेंगे। भारत का एविएशन मार्केट, बढ़ती मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं द्वारा संचालित, महत्वपूर्ण विकास के लिए तैयार है। द्विपक्षीय संबंधों में बदलाव, जैसे कि निवेश नियमों में ढील और ब्रिक्स (BRICS) के भीतर घनिष्ठ संबंध, उनके जटिल रिश्ते के व्यावहारिक प्रबंधन को दर्शाते हैं। हालांकि, भविष्य की प्रगति बीजिंग की भारत के रणनीतिक हितों पर विचार करने की इच्छा पर निर्भर करेगी, जो निरंतर अविश्वास और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता से जटिल एक मुद्दा है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.