ओवरलोड वाहनों पर कड़े नियम लागू
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। 15 अप्रैल से लागू होने वाले नए नियमों में, जुर्माने की राशि निश्चित रखने की बजाय, वाहन पर कितनी अधिक लोडिंग (वजन) है, उसी के आधार पर तय की जाएगी।
जुर्माने की नई दरें क्या होंगी?
अब से, अगर कोई वाहन अपनी तय वजन सीमा से 10% तक ज्यादा लोड ले जाता है, तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। लेकिन, अगर यह ओवरलोडिंग 10% से 40% के बीच है, तो ऐसे ट्रांसपोर्ट वाहनों पर बेस टोल रेट का दोगुना (2x) जुर्माना लगेगा। और अगर ओवरलोडिंग 40% से ज्यादा पाई जाती है, तो ऐसे वाहनों से मानक शुल्क का चौगुना (4x) जुर्माना वसूला जाएगा।
सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
सरकार का मुख्य लक्ष्य इन कड़े नियमों से सड़कों की सुरक्षा को बढ़ाना और राष्ट्रीय राजमार्गों के इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। साथ ही, छोटी-मोटी वजन की गड़बड़ी पर बेवजह परेशान न किया जाए, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। ओवरलोडिंग के जुर्माने की वसूली FASTag और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के जरिए की जाएगी। इस पर सख्ती से नजर रखने के लिए 'वी-इन-मोशन' (WIM) सिस्टम या टोल प्लाजा पर लगे स्टैटिक वे-ब्रिज का ही इस्तेमाल किया जाएगा। वाहन का वजन, उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में दर्ज ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) के मुकाबले मापा जाएगा।
डेटा ट्रांसपेरेंसी भी होगी सुनिश्चित
प्रशासनिक सुधार और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए, मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि ओवरलोडेड वाहनों का पूरा ब्यौरा, जिसमें अतिरिक्त वजन की सटीक जानकारी शामिल हो, ऑटोमैटिक रूप से रिकॉर्ड किया जाए और VAHAN डेटाबेस में भेजा जाए। इससे नियमों के पालन का एक स्पष्ट और ऑडिट होने योग्य रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।