भारत की इमिग्रेशन टेक को बड़ा बूस्ट! ₹1,800 करोड़ के साथ मार्च 2031 तक होगा बड़ा अपग्रेड

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत की इमिग्रेशन टेक को बड़ा बूस्ट! ₹1,800 करोड़ के साथ मार्च 2031 तक होगा बड़ा अपग्रेड
Overview

केंद्रीय कैबिनेट ने भारत की इमिग्रेशन, वीज़ा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (IVFRT) स्कीम को मार्च 2031 तक बढ़ाने के लिए **₹1,800 करोड़** की मंजूरी दे दी है। यह पहल मौजूदा डिजिटल ढांचे पर आधारित है, जिसका मकसद एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से बॉर्डर मैनेजमेंट और यात्रियों की सेवाओं को बेहतर बनाना है।

इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा निवेश

भारत सरकार ने अपनी IVFRT स्कीम को आगे बढ़ाने का एक बड़ा फैसला लिया है। अगले 7 सालों यानी मार्च 2031 तक इस स्कीम पर ₹1,800 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस मंजूरी के साथ, देश का इमिग्रेशन और वीज़ा सिस्टम और भी ज्यादा मजबूत और टेक्नोलॉजी-संचालित हो जाएगा। यह कदम देश की सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्रा को भी आसान बनाएगा। सरकार का लक्ष्य नए इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम, 2025 (Immigration and Foreigners Act, 2025) के तहत टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस डिलीवरी में लगातार सुधार करना है।

क्या है IVFRT स्कीम?

IVFRT स्कीम, जो 2010 में पहली बार शुरू की गई थी, वीज़ा जारी करने, इमिग्रेशन क्लीयरेंस और विदेशी पंजीकरण को एकीकृत करने का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे अब तक कई चरणों में अपडेट किया गया है। पिछले अपडेट्स ने यात्रियों के औसत क्लीयरेंस समय को लगभग 2.5-3 मिनट तक कम करने और 91% से अधिक ई-वीज़ा आवेदनों के लिए 72 घंटों के भीतर कॉन्टैक्टलेस प्रोसेसिंग की सुविधा दी है। इस नए विस्तार का उद्देश्य अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाना और कोर इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना है। इसमें मोबाइल सेवाएं, सेल्फ-सर्विस कियोस्क और यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

ग्लोबल ट्रेंड्स और इकोनॉमिक फायदा

दुनियाभर के कई देश, जैसे सिंगापुर और जापान, कुशल श्रमिकों को आकर्षित करने के लिए अपनी इमिग्रेशन नीतियों और बॉर्डर मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी को लगातार बेहतर बना रहे हैं। भारत की IVFRT स्कीम भी इसी ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है। इससे टूरिज्म, एविएशन और ट्रेड जैसे सेक्टरों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, प्रोफेशनल जैसे इंजीनियर्स के लिए ई-वीज़ा को सुव्यवस्थित करने से मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे प्रमुख सेक्टर्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। पिछले फंडिंग्स पर नजर डालें तो 2010 में ₹1,011 करोड़, 2015 में ₹638.90 करोड़, और 2022 में ₹1,365 करोड़ जारी किए गए थे। यह स्कीम वर्तमान में 117 इमिग्रेशन पोस्ट्स और कई पंजीकरण प्राधिकरणों को कवर करती है।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालांकि, इस बड़े अपग्रेड के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। सरकार के बड़े IT प्रोजेक्ट्स में अक्सर संसाधनों की कमी, नौकरशाही की अड़चनें और डेटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं रही हैं। नई टेक्नोलॉजी की सफलता सही कार्यान्वयन, पुराने सिस्टम के साथ एकीकरण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर निर्भर करेगी। नया इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम, 2025, कानूनों को सरल बनाता है, लेकिन नियोक्ताओं, स्कूलों और होटलों के लिए सख्त दंड और अनुपालन दायित्व भी पेश करता है, जिनके सुचारू प्रबंधन की आवश्यकता होगी। ₹1,800 करोड़ के बजट में बड़े टेक प्रोजेक्ट्स में आम लागत में वृद्धि की संभावना को भी ध्यान में रखना होगा। टेक्नोलॉजी अपग्रेड को सिस्टम का उपयोग करने वाले लोगों के कौशल विकास और प्रशिक्षण के साथ संतुलित करने की आवश्यकता होगी।

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