देश की हवाई कनेक्टिविटी का होगा कायाकल्प
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया है कि सरकार 'उड़ान' (Udan) स्कीम के तहत अपने रीजनल एयर कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अगले दशक में ₹28,840 करोड़ खर्च करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य टियर-II और टियर-III शहरों तक हवाई सफर को सुलभ बनाना है, जिससे इन इलाकों में आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। सरकार Embraer और Leonardo जैसी प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियों को भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स (Manufacturing Units) लगाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगी। ये कदम पिछली योजनाओं के विपरीत हैं, जहां 'उड़ान' के शुरुआती फेज में लॉन्च किए गए 649 में से लगभग आधे रूट बाद में बंद कर दिए गए थे।
इस खबर के बीच, Embraer (ERJ) के शेयर करीब $59.03 पर ट्रेड कर रहे थे, जिसका TTM P/E 36.7x है, जो भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है। वहीं, Leonardo SpA (LDO) के शेयर करीब €58.04 पर थे, जिनका TTM P/E 29.69x है। Embraer के पास $31.6 बिलियन का ऑर्डर बैकलॉग (Order Backlog) है, और Leonardo ने 2025 के लिए €23.8 बिलियन के ऑर्डर दर्ज किए हैं, जो भारत में संभावित मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
लोकल प्रोडक्शन की राह में ऑर्डर्स की अहमियत
'उड़ान' स्कीम का एक अहम हिस्सा रीजनल एयरक्राफ्ट्स का लोकल मैन्युफैक्चरिंग (Local Manufacturing) बढ़ाना है। Embraer, Adani Group के साथ मिलकर भारत में E175 रीजनल जेट्स के लिए एक असेंबली लाइन (Assembly Line) लगाने पर विचार कर रही है। यह भारत का अपनी तरह का पहला कमर्शियल एयरक्राफ्ट फैसिलिटी (Commercial Aircraft Facility) होगा। लेकिन, Embraer का यह संभावित निवेश तभी आगे बढ़ेगा जब वह कम से कम 200 एयरक्राफ्ट्स के लिए ऑर्डर सुरक्षित कर पाएगी। यानी, भारत के मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों का सीधा संबंध एयरलाइंस के भविष्य के खरीद फैसलों से जुड़ा है। वैश्विक सप्लाई चेन (Supply Chain) की समस्याएं भी प्रोडक्शन को धीमा कर रही हैं और डिलीवरी बैकलॉग बढ़ा रही हैं।
रीजनल एयरक्राफ्ट मार्केट 2025 में $13.8 बिलियन से बढ़कर 2034 तक $21.2 बिलियन होने का अनुमान है। Embraer रीजनल जेट्स में लीडर है, जबकि ATR टर्बोप्रॉप्स (Turboprops) में मजबूत है। Embraer की लोकल असेंबली योजना बड़े ऑर्डर मिलने पर निर्भर करती है। ATR जैसे कंपटीटर्स (Competitors) मजबूत बने हुए हैं। पायलटों की कमी और इंजन संबंधी समस्याओं के कारण रीजनल जेट मार्केट में अधिक विमानों को ग्राउंडेड (Grounded) देखा गया है। Leonardo का हेलिकॉप्टर प्रोडक्शन में शामिल होना, उसके बड़े ऑर्डर बुक के सहारे इस पहल को और मजबूत करता है।
पिछली नाकामियां और वित्तीय चुनौतियां
नई सरकारी मदद के बावजूद, 'उड़ान' स्कीम को पिछली समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी (Subsidy) खत्म होने के बाद केवल 7% से 10% रूट ही आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Financially Viable) रह पाए। फरवरी 2026 तक, लॉन्च किए गए 663 में से 327 से अधिक रूट बंद हो चुके थे, और 95 रिवाइव्ड एयरपोर्ट्स में से 15 ने काम बंद कर दिया था। एयरलाइंस को लाभप्रदता (Profitability) तक पहुंचने में मदद करने के लिए सब्सिडी अवधि को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। हालांकि, एयरफेयर लेवी (Airfare Levies) से सीधे सरकारी खर्च में फंड का बदलना करदाताओं के लिए लागत बढ़ाता है।
भारतीय एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) भी गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रहा है। एयरलाइंस ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में ₹5,289.73 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, और फाइनेंशियल ईयर 2026 में और अधिक नुकसान की आशंका है। यह सेक्टर ईंधन की बढ़ती कीमतों और मुद्रा में गिरावट के प्रति संवेदनशील है, जो भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) से और बढ़ गया है। हालांकि विश्लेषकों को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक नुकसान में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन इस स्कीम में छोटी एयरलाइंस को अब भी अनिश्चित लंबे समय की व्यवहार्यता (Long-term Viability) को देखते हुए काफी जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।
आउटलुक: जोखिमों के बीच उम्मीद
विश्लेषक आम तौर पर Embraer और Leonardo को लेकर सकारात्मक हैं। वॉल स्ट्रीट (Wall Street) Embraer (EMBJ) को $80.93 के प्राइस टारगेट (Price Target) के साथ 'बुलिश' (Bullish) रेट करता है, और Leonardo SpA (LDO) के पास €67.10 के टारगेट के साथ 'बाय' (Buy) की कंसेंसस रेटिंग (Consensus Rating) है। विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं (Developing Economies) और कुशल परिवहन (Efficient Transport) की आवश्यकता से प्रेरित होकर, वैश्विक रीजनल एयरक्राफ्ट मार्केट में वृद्धि की उम्मीद है। भारत के महत्वपूर्ण 'उड़ान' निवेश और मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्य इन विमानों को विस्तारित हवाई नेटवर्क में एकीकृत करने पर निर्भर करते हैं। लंबी सब्सिडी अवधि और सीधी सरकारी फंडिंग का उद्देश्य एयरलाइन जोखिम को कम करना है। हालांकि, समग्र सफलता स्थिर मांग, एयरलाइन की वित्तीय स्थिरता और Embraer द्वारा बड़े विमान ऑर्डर हासिल करने पर निर्भर करती है – ये ऐसे तत्व हैं जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से एविएशन सेक्टर में अस्थिरता दिखाई है।