समुद्री विकास पर बड़ा दांव
इस बजट आवंटन का मुख्य उद्देश्य देश की लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन को सुदृढ़ करना है। सरकार की योजना अगले 5 सालों में 20 नए नेशनल वॉटरवेज (NWs) को चालू करने की है, जिसकी शुरुआत ओडिशा में NW-5 से होगी। यह सड़क और रेल परिवहन का एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगा।
कोस्टल शिपिंग को मिलेगी रफ्तार
इसके साथ ही, एक 'कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम' (Coastal Cargo Promotion Scheme) के तहत, 2047 तक इनलैंड वॉटरवेज और कोस्टल शिपिंग का संयुक्त हिस्सा मौजूदा 6% से दोगुना करके 12% करने का लक्ष्य है। आपको बता दें कि वर्तमान में इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट (IWT) कुल फ्रेट मूवमेंट का केवल 2% है, जो FY25 में 145.5 मिलियन टन था।
लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई दिशा
सरकार का यह कदम 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' (Maritime India Vision 2030) और 'अमृत काल विजन 2047' (Amrit Kaal Vision 2047) जैसी महत्वकांक्षी योजनाओं के अनुरूप है, जिसका मकसद भारत को एक ग्लोबल मैरीटाइम हब बनाना है। पूर्वी भारत के डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) का निर्माण भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो माल ढुलाई के समय को कम करेगा।
शिपबिल्डिंग में पिछड़ रहा भारत
यह तब हो रहा है जब भारत का शिपबिल्डिंग सेक्टर वैश्विक स्तर पर काफी पीछे है। भारत की मार्केट शेयर सिर्फ 0.06% है, जबकि चीन (~51-56%), दक्षिण कोरिया (~28%) और जापान (~15%) जैसे देश इस क्षेत्र में हावी हैं।
अन्य पहलों पर भी ज़ोर
इसके अलावा, जलमार्ग क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट के लिए रीजनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (Regional Centres of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम (Ship Repair Ecosystems) बनाने का भी प्रस्ताव है। सरकार सीप्लेन मैन्युफैक्चरिंग (Seaplane Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना भी लाएगी, जिससे क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की राह
इनलैंड वॉटरवेज, कोस्टल शिपिंग, फ्रेट कॉरिडोर और एयर कनेक्टिविटी का यह एकीकृत दृष्टिकोण देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत करेगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होगी, ट्रेड कॉम्पिटिटिवनेस (Trade Competitiveness) बढ़ेगी और पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी हासिल करने में मदद मिलेगी। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसी कंपनियों का फॉरवर्ड पी/ई रेशियो (P/E Ratio) लगभग 39.6x-41.1x और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) का 54.25x-60.05x के आसपास है, जो इस क्षेत्र में सरकारी फोकस को दर्शाता है।