India Highway Update: 10,389 km के हाई-स्पीड कॉरिडोर मंजूर, 4,809 km हुए पूरे

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Highway Update: 10,389 km के हाई-स्पीड कॉरिडोर मंजूर, 4,809 km हुए पूरे

देशभर में नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के लिए **10,389 किलोमीटर** से ज़्यादा लंबाई को मंज़ूरी मिल चुकी है। इसमें से लगभग आधे, यानी **4,809 किलोमीटर** के कॉरिडोर पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं।

Detailed Coverage

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पूरे देश में नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के लिए 10,389 किलोमीटर के प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। संसद को दी गई एक ताज़ा जानकारी के मुताबिक, इनमें से 4,809 किलोमीटर के कॉरिडोर पहले से चालू हैं, जबकि 5,580 किलोमीटर पर काम चल रहा है। वहीं, करीब 1,022 किलोमीटर के मंजूर प्रोजेक्ट्स पर अभी काम शुरू होना बाकी है।

राज्यों में काम की स्थिति

अलग-अलग राज्यों में प्रोजेक्ट्स के पूरे होने की दरें काफी अलग हैं। राजस्थान 1,340 किलोमीटर में से 1,192 किलोमीटर पूरे करके सबसे आगे है। हरियाणा में 615 किलोमीटर और गुजरात में 605 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। वहीं, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े हिस्से पर अभी भी निर्माण कार्य जारी है। बिहार में मंजूर हुए सभी 589 किलोमीटर पर काम चल रहा है।

प्रोजेक्ट्स में तेज़ी लाने के उपाय

जमीन अधिग्रहण में देरी और पर्यावरण मंज़ूरी जैसी दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने 'भूमिराशि' और 'परिवेश' जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को एकीकृत किया है। इसके अलावा, रेलवे के साथ मिलकर रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) के लिए मंज़ूरी प्रक्रिया को भी डिजिटल किया जा रहा है। इन कदमों से प्रोजेक्ट शुरू होने और साइट पर काम शुरू होने के बीच का समय कम होने की उम्मीद है।

पोर्ट कनेक्टिविटी का विस्तार

मंत्रालय ने ₹4,362.39 करोड़ की लागत से 32 किलोमीटर के फोर-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट को भी मंज़ूरी दी है। यह प्रोजेक्ट नए वाधवन पोर्ट को वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे और NH-48 से जोड़ेगा। EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मॉडल के तहत बन रहे इस प्रोजेक्ट में, अगर समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो लागत बढ़ने का सारा बोझ डेवलपर पर आएगा।

निवेशकों के लिए, 5,580 किलोमीटर के उन प्रोजेक्ट्स पर नज़र रहेगी जो अभी निर्माणाधीन हैं और जल्द ही चालू हो जाएंगे। भविष्य की प्रगति राज्यों के सहयोग और साइट-विशिष्ट बाधाओं को दूर करने की सरकार की क्षमता पर निर्भर करेगी, जिसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के रेवेन्यू और कैश फ्लो पर पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.