भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण है। फाइनेंशियल ईयर **2027** में पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ गिरकर **1-3%** पर सिमटने का अनुमान है, जबकि एयरलाइंस भारी नुकसान और रेगुलेटरी सख्ती से जूझ रही हैं।
धीमी होती रफ्तार और चुनौतियां
भारतीय एविएशन सेक्टर अब एक सतर्कता के दौर में प्रवेश कर रहा है। FY2027 के लिए पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ के अनुमानों को घटाकर 1-3% कर दिया गया है। इससे कुल पैसेंजर वॉल्यूम लगभग 424-432 मिलियन तक रहने की उम्मीद है, जो पिछले सालों की तेजी के मुकाबले एक बड़ा झटका है।
एयरपोर्ट्स की रणनीति और कमाई
भले ही यात्रियों की संख्या धीमी गति से बढ़ रही हो, लेकिन एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को सुरक्षित करने में लगे हैं। एयरपोर्ट कंपनियों का रेवेन्यू FY2027 में 6-8% बढ़ने की उम्मीद है। यह मुनाफा बढ़ाने के लिए एयरपोर्ट फीस में बदलाव और नॉन-एरोनॉटिकल इनकम (जैसे रिटेल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स) पर फोकस कर रहे हैं।
एयरलाइंस पर गहराता संकट
दूसरी ओर, एयरलाइंस इंडस्ट्री भयंकर वित्तीय दबाव में है। अनुमान है कि एयरलाइंस को इस फाइनेंशियल ईयर में ₹360 अरब से ₹380 अरब तक का नेट लॉस हो सकता है। इसकी बड़ी वजहें हैं:
- वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव।
- ऊंची एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें।
- एयरक्राफ्ट की कमी और मेंटेनेंस में देरी।
रेगुलेटरी सख्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर का भविष्य
हाल ही में DGCA द्वारा की गई सेफ्टी ऑडिट में IndiGo, Air India, Akasa Air और SpiceJet जैसी दिग्गज कंपनियों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। इससे कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के लिए भारत का एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत बना हुआ है। अगले 5 सालों में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए ₹1 लाख करोड़ का निवेश करने की योजना है, जो सेक्टर में विश्वास को बनाए रखने का संकेत है।
