नई UDAN स्कीम का दम और फंडिंग
नई 'मॉडिफाइड UDAN' स्कीम के तहत सरकार 100 नए एयरपोर्ट (मौजूदा हवाई पट्टियों का इस्तेमाल करके) और 200 हेलीपैड का विकास करेगी। इस पर करीब ₹12,159 करोड़ एयरपोर्ट डेवलपमेंट के लिए और ₹3,661 करोड़ हेलीपैड के लिए आवंटित किए गए हैं। इस कदम से उन इलाकों को जोड़ा जाएगा जहां अभी हवाई सुविधा नहीं है, और वहां के आर्थिक विकास की राह खुलेगी। यह स्कीम पिछले संस्करणों की उन समस्याओं को दूर करने पर भी ध्यान देगी, जैसे कि कम इस्तेमाल होने वाले एयरपोर्ट या संचालन में दिक्कतें।
नए UDAN प्लान का इकोनॉमिक असर
सिर्फ सफर ही नहीं, इन एयरपोर्ट्स को आर्थिक विकास का इंजन बनाने की योजना है। रिसर्च बताती है कि हवाई कनेक्टिविटी का 3.1 का इकोनॉमिक मल्टीप्लायर इफेक्ट होता है और हर संबंधित नौकरी के लिए 6.1 नौकरियां पैदा होती हैं। एयरलाइंस को क्षेत्रीय रूट पर लागत और कमाई के अंतर को पाटने के लिए ₹10,043 करोड़ की 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) दी जाएगी। इसके अलावा, करीब 441 एयरोड्रोम के संचालन और रखरखाव के लिए अगले तीन सालों में ₹2,577 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और HAL डोर्नियर एयरक्राफ्ट जैसे स्वदेशी विमानों को भी बढ़ावा देगी।
भारतीय एविएशन मार्केट का आउटलुक और चुनौतियां
भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2034 तक $45.6 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से आएगा। हालांकि, पिछली UDAN स्कीमों में सब्सिडी खत्म होने के बाद कई रूट बंद हो गए थे। क्षेत्रीय एयरलाइंस को IndiGo और Air India ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिनका मार्केट शेयर 90% से ज्यादा है। फ्यूल की ऊंची कीमतें और सीमित विमानों की उपलब्धता भी एक चुनौती है।
भविष्य की कनेक्टिविटी का विजन
इस नई स्कीम का विजन सिर्फ हवाई यात्रा को सस्ता बनाना नहीं, बल्कि अविकसित इलाकों में नए व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 350-400 एयरपोर्ट तक नेटवर्क फैलाना है, जो भारत को वैश्विक विमानन लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।