केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 'Integrated Transport and Logistics Authority' (ITLA) के गठन को मंजूरी दे दी है। यह नई एजेंसी अब **₹500 करोड़** से अधिक के सभी प्रोजेक्ट्स का टेक्निकल अप्रेजल करेगी।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर अब नई निगरानी
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। अब केंद्र सरकार का कोई भी प्रोजेक्ट जिसकी वैल्यू ₹500 करोड़ या उससे ज्यादा है, उसे ITLA की टेक्निकल रिव्यू प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि, फाइनेंशियल अप्रूवल पुरानी प्रक्रिया के तहत ही होंगे, लेकिन ITLA यह सुनिश्चित करेगा कि प्रोजेक्ट्स अलग-थलग नहीं, बल्कि एक दूसरे से जुड़े हुए हों।
उदाहरण के लिए, भविष्य में किसी भी फ्रेट कॉरिडोर की योजना बनाते समय, अथॉरिटी 'National Transport Data Repository' के डेटा का उपयोग करेगी। इसमें FASTag, GSTN e-way bills और Vahan जैसे स्रोतों से जानकारी ली जाएगी ताकि सड़क, रेल और पोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। इसका मुख्य मकसद खराब प्लानिंग के कारण होने वाले खर्च को कम करना और भारत के लॉजिस्टिक्स-टू-GDP रेशियो में सुधार करना है।
कंपनियों के लिए क्या हैं फायदे और जोखिम?
प्रोजेक्ट्स की बेहतर सिनर्जी से कंस्ट्रक्शन कंपनियों को टेंडरिंग प्रोसेस में आसानी हो सकती है। सही प्लानिंग का मतलब है प्रोजेक्ट के दौरान कम बदलाव और तेज एग्जीक्यूशन, जिससे कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है।
हालांकि, इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा रिस्क 'इंस्टीट्यूशनल फ्रिक्शन' का है, क्योंकि रेलवे, सड़क और शिपिंग जैसे मंत्रालय अपनी स्वायत्तता कम होने को लेकर असहज हो सकते हैं। इसके अलावा, ITLA के पास सीधे निर्माण (execution) की ताकत नहीं है, वह केवल एक सलाहकार के तौर पर काम करेगी। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि यह नई संस्था PM Gati Shakti के साथ कैसे समन्वय बिठाती है, कहीं यह केवल एक और प्रशासनिक लेयर न बन जाए।
आगे क्या देखें?
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण होगा कि सरकार '10-year National Transport Master Plan' को किस तरह लागू करती है। साथ ही, यह देखना भी जरूरी होगा कि प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में तेजी आती है या नई औपचारिकताएं काम को धीमा करती हैं।
