India Airports: 25% फीस कट का बड़ा झटका! एयरपोर्ट ऑपरेटर्स पर मंडराया कैश का संकट, सरकार से मांगी मदद

TRANSPORTATION
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AuthorNeha Patil|Published at:
India Airports: 25% फीस कट का बड़ा झटका! एयरपोर्ट ऑपरेटर्स पर मंडराया कैश का संकट, सरकार से मांगी मदद
Overview

भारत के एयरपोर्ट ऑपरेटर्स (Airport Operators) इन दिनों मुश्किल में हैं। सरकार की ओर से डोमेस्टिक फ्लाइट्स (Domestic Flights) के लिए लैंडिंग और पार्किंग फीस (Landing & Parking Fees) में **25%** की अनिवार्य कटौती के बाद, ये ऑपरेटर्स अब मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन (MoCA) से फौरन मदद की गुहार लगा रहे हैं।

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अचानक हुए फैसले से एयरपोर्ट्स पर संकट

दरअसल, एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने यह फैसला लिया है कि देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए लैंडिंग और पार्किंग फीस को 3 महीने के लिए 25% तक कम कर दिया जाए। एयरपोर्ट ऑपरेटर्स इस कदम का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि यह अचानक लिया गया फैसला है, जिस पर उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। उनका तर्क है कि इससे पिछले 16 सालों से बनाई गई रेगुलेटरी स्थिरता खतरे में पड़ गई है।

कैश फ्लो पर गंभीर असर, कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल

ऑपरेटर्स की मानें तो इस 25% की कटौती से उनके इमीडिएट कैश फ्लो (Cash Flow) पर गंभीर असर पड़ेगा और कर्ज (Debt) चुकाने की उनकी क्षमता प्रभावित होगी। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एयरपोर्ट चलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस और सुरक्षा जैसे जरूरी खर्चे फिक्स (Fixed) होते हैं, जिन्हें कम नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, नॉन-एरोनॉटिकल सोर्स (Non-Aeronautical Sources) से होने वाली कमाई का नुकसान भी रिकवर नहीं हो पाएगा। आय में कमी और खर्चों में कोई कमी न आने से उनकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

ऑपरेटर्स ने सुझाए समाधान: फीस में छूट, वैट कटौती की मांग

एयरपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (APAO) ने मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन (MoCA) को एक लेटर लिखकर कुछ समाधान सुझाए हैं। वे एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से अपील कर रहे हैं कि चार्ज कट के बराबर के रेवेन्यू शेयर (Revenue Share) या पर-पैसेंजर फीस (Per-Passenger Fees) को बिना किसी इंटरेस्ट या पेनल्टी के टाल दिया जाए। एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) बढ़ाकर नुकसान की भरपाई की जा सकती है। साथ ही, ऑपरेटर राज्य सरकारों से सहयोग की अपील कर रहे हैं कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) को घटाकर 5% या उससे कम किया जाए। ऑपरेटर्स का कहना है कि फाइनेंशियल हेल्थ (Financial Health) को बनाए रखना जरूरी है, खासकर उन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जिनका फाइनेंसिंग अधिकतर पब्लिक सेक्टर बैंकों (Public Sector Banks) से होता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.