दिवाली और छठ के दौरान हवाई सफर करना आपकी जेब पर भारी पड़ रहा है। प्रमुख रूट्स पर टिकट के दाम पिछले साल के मुकाबले **100%** तक बढ़ गए हैं। विमानों की कमी और महंगे ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की वजह से यात्रियों को रिकॉर्ड कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।
सप्लाई और डिमांड का बिगड़ा खेल
त्योहारी सीजन में एयर ट्रेवल की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, लेकिन इसके मुकाबले विमानों की संख्या सीमित बनी हुई है। पटना और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों के लिए हवाई टिकट की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 100% से ज्यादा ऊपर जा चुकी हैं। यह सिर्फ सीजनल डिमांड नहीं, बल्कि विमानों की भारी किल्लत का नतीजा है।
क्यों बढ़े हैं दाम?
एयरलाइंस सेक्टर इस वक्त सप्लाई चेन की चुनौतियों से जूझ रहा है। नई विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण एयरलाइंस की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ नहीं पा रही है। इसके अलावा, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें ₹137 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं, जिसका बोझ सीधे यात्रियों पर डाला जा रहा है।
सरकार का क्या है रुख?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे टिकट कीमतों पर कोई 'कैप' (Price Cap) नहीं लगाएंगे। सरकार ने एयरलाइंस से केवल इतना कहा है कि वे किराए को उचित स्तर पर रखें। इसका मतलब साफ है कि फिलहाल बाजार की ताकतें ही तय करेंगी कि आपकी टिकट कितनी महंगी होगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति थोड़ी उलझी हुई है। अधिक किराए से कंपनियों के रेवेन्यू पर असर तो दिख रहा है, लेकिन विमानों की डिलीवरी में देरी उनकी लंबी अवधि की ग्रोथ को रोक रही है। अगले कुछ क्वार्टर में यह देखना सबसे जरूरी होगा कि विमान निर्माता कंपनियां कितनी जल्दी नई डिलीवरी करती हैं, क्योंकि इसी पर एयरलाइंस की फ्लीट यूटिलाइजेशन और प्रॉफिटेबिलिटी टिकी हुई है।
