पहले हाफ में भारत में डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक में मामूली **1.44%** की ग्रोथ दर्ज की गई, कुल **864.04 लाख** यात्री रहे। वहीं, जून में IndiGo ने अपना मार्केट शेयर **66.3%** तक बढ़ाया, जबकि एयर इंडिया ग्रुप का शेयर घटकर **23.9%** पर आ गया।
Detailed Coverage
एयर ट्रैफिक में धीमी रफ़्तार
साल 2026 के पहले छह महीनों में भारत में डोमेस्टिक एयर ट्रैवल में लगातार लेकिन धीमी ग्रोथ देखने को मिली। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच एयरलाइनों ने 864.04 लाख यात्रियों को सफर कराया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 1.44% ज़्यादा है। हालांकि, साल-दर-साल जून के आंकड़ों में थोड़ी नरमी दिखी, जहां यात्रियों की संख्या 1.03% घटकर 134.64 लाख पर आ गई।
एयरलाइन मार्केट शेयर में बड़े बदलाव
InterGlobe Aviation द्वारा संचालित IndiGo ने घरेलू आसमान में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। जून में एयरलाइन ने 66.3% मार्केट शेयर पर कब्जा किया, जो मई के 64.9% से ज़्यादा है। यह दिखाता है कि इंडस्ट्री में क्षमता बढ़ने के बावजूद कंपनी अपने ऑपरेशन्स को बढ़ाने में कामयाब रही है। वहीं, दूसरी ओर, एयर इंडिया ग्रुप, जिसमें एयर इंडिया, AIX कनेक्ट और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं, का मार्केट शेयर जून में घटकर 23.9% रह गया, जो पिछले महीने 25.6% था।
Akasa Air एक महत्वपूर्ण प्लेयर के तौर पर उभर रही है, जिसने जून में अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर 6.4% कर लिया है, जबकि मई में यह 5.8% था। वहीं, SpiceJet का मार्केट शेयर घटकर 1.9% रह गया, जो कंपनी के लिए चल रही चुनौतियों को दर्शाता है। Fly91 और Alliance Air जैसी छोटी एयरलाइनों का मार्केट शेयर 0.4% पर स्थिर रहा।
ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और यात्री अनुभव
निवेशकों की नज़र अक्सर पैसेंजर लोड फैक्टर पर रहती है, जो यह मापता है कि एयरलाइन की कितनी सीटिंग कैपेसिटी वास्तव में बिक चुकी है। जून में Akasa Air का लोड फैक्टर 92.2% के साथ इंडस्ट्री में सबसे ज़्यादा रहा, हालांकि मई के 92.5% से यह मामूली गिरावट थी। SpiceJet का लोड फैक्टर सुधरकर 87.8% हो गया, जबकि एयर इंडिया ग्रुप का लोड फैक्टर बढ़कर 85.5% रहा। IndiGo का लोड फैक्टर 85.1% दर्ज किया गया।
फ्लाइट कैंसलेशन रेट जून में थोड़ा बढ़कर 0.63% हो गया, जो मई में 0.55% था। IndiaOne Air की कैंसलेशन रेट 16.43% रही, जो मुख्य रूप से तकनीकी और ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण थी। जून में एयरलाइनों को 2,568 यात्री शिकायतें मिलीं, जो हर 10,000 यात्रियों पर 1.91 की दर है। Alliance Air को सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं।
निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि जून में यात्री ट्रैफिक में आई यह कमी सिर्फ एक मौसमी उतार-चढ़ाव है या फिर ट्रैवल डिमांड में नरमी की शुरुआत। भारतीय एविएशन सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी यात्री वॉल्यूम, फ्यूल की कीमतों और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग स्ट्रैटेजीज़ पर बहुत निर्भर करती है। आने वाले तिमाही नतीजे और मैनेजमेंट की डिमांड आउटलुक पर टिप्पणी InterGlobe Aviation जैसी लिस्टेड कंपनियों के रेवेन्यू और मार्जिन पर इन बदलावों के असर को समझने में मददगार होगी।
