भारत का एयर कार्गो सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में इस सेक्टर ने **12%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की है। यह उछाल सरकारी नीतियों और ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग का नतीजा है।
###政策 और ई-कॉमर्स का डबल बूस्ट
सरकार द्वारा एक्सपोर्ट वैल्यू कैप हटाने और नए ट्रांसशिपमेंट हब बनाने से भारतीय एयर कार्गो बाज़ार में तेज़ी आई है। इस तिमाही में 12% की सालाना ग्रोथ देखने को मिली है, जिसमें इंटरनेशनल कार्गो में 14% की वृद्धि शामिल है। क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स की लगातार बढ़ती मांग और भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में हो रही तरक्की इस ग्रोथ के पीछे बड़े कारण हैं।
बड़ा पॉलिसी बदलाव
यूनियन बजट 2026 में ₹10 लाख प्रति कंसाइनमेंट की कूरियर एक्सपोर्ट वैल्यू कैप को हटा दिया गया है, जिससे ई-कॉमर्स एक्सपोर्टर्स के लिए रास्ते आसान हो गए हैं। इसके अलावा, दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब तेज़ी से तैयार हो रहे हैं। इससे कार्गो के कनेक्शन का समय 36-48 घंटे से घटकर सिर्फ 5-8 घंटे रह गया है, जिससे भारतीय एयरपोर्ट्स ग्लोबल ट्रेड के लिए ज़्यादा कंपटीटिव बन गए हैं।
लॉजिस्टिक्स कंपनियों की नई रणनीति
Blue Dart Express जैसी लॉजिस्टिक्स कंपनियां इस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। FY2025-26 में ₹6,141 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज करने वाली Blue Dart सितंबर 2026 में एक खास इंटरनेशनल क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स डिलीवरी प्रोडक्ट लॉन्च करने वाली है। यह कदम दिखाता है कि डोमेस्टिक कंपनियां कैसे ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी जगह बना रही हैं और FedEx व DHL जैसे इंटरनेशनल प्लेयर्स को टक्कर देने की कोशिश कर रही हैं।
'मेक इन इंडिया' का फायदा
'मेक इन इंडिया' पहल, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में, भी कार्गो सेक्टर को सपोर्ट कर रही है। Micron Technology और Kaynes Technology जैसी कंपनियां जैसे-जैसे अपनी लोकल असेंबली कैपेसिटी बढ़ा रही हैं, AI चिप्स और सर्वर रैक जैसे हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स के एयर-फ्रेट की मांग बढ़ रही है। Air India के पायलट ट्रांसशिपमेंट प्रोजेक्ट ने चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट जैसे रूट पर कार्गो वॉल्यूम को दोगुना कर दिया है।
निवेश के लिए रिस्क फैक्टर
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नज़र रखनी चाहिए। ग्लोबल लॉजिस्टिक्स दिग्गज और IndiGo व Air India जैसे डोमेस्टिक प्लेयर्स के बीच कंपटीशन बढ़ रहा है, जिससे फ्रेट रेट्स पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन और एयर-स्पेस प्रतिबंधों का इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को नए इंटरनेशनल प्रोडक्ट्स की सफलता, ई-कॉमर्स सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ और नए ट्रांसशिपमेंट हब्स की एफिशिएंसी पर नज़र रखनी चाहिए।
