IndiGo ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी Q2 2028 से अपने नए A350 फ्लीट में 16 'लाइ-फ्लैट' बिजनेस क्लास सीटों के साथ तीन-क्लास कॉन्फ़िगरेशन पेश करेगी। साथ ही, कंपनी बढ़ती चुनौतियों के बीच फ्यूल हेजिंग पॉलिसी की समीक्षा कर रही है। इससे पहले सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी को **₹1,879.1 करोड़** का नुकसान हुआ था।
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo अब अपने पारंपरिक लो-कॉस्ट मॉडल से आगे बढ़कर बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। एयरलाइन ने ऐलान किया है कि वह अपने आने वाले Airbus A350-900 वाइड-बॉडी विमानों में तीन-क्लास वाली प्रीमियम सीटिंग व्यवस्था शुरू करेगी। यह बदलाव एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय लॉन्ग-हॉल रूट पर कड़ी प्रतिस्पर्धा में उतारने के लिए तैयार कर रहा है।
नई उड़ान और सुविधाएं
साल 2028 की दूसरी तिमाही से कंपनी के बेड़े में पहले 10 विमान शामिल होने की उम्मीद है। इन विमानों में 16 'लाइ-फ्लैट' बिजनेस-क्लास सीटें होंगी, जिसके साथ प्रीमियम इकोनॉमी और स्टैंडर्ड इकोनॉमी का भी विकल्प होगा। यह कदम कंपनी की ऑपरेशनल सादगी को चुनौती देगा, क्योंकि अब उसे न केवल मेंटेनेंस, बल्कि सर्विसिंग में भी ज्यादा complejidad (जटिलता) का सामना करना होगा।
फ्यूल हेजिंग पर मंथन
IndiGo फिलहाल अपनी फ्यूल लागत को लेकर कोई हेजिंग नहीं करती है, यानी तेल बाजार की कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनी पर पड़ता है। लेकिन अब कंपनी इस पर दोबारा विचार कर रही है। चूंकि लॉन्ग-हॉल उड़ानों में तेल की खपत बहुत अधिक होती है, इसलिए प्राइस वोलेटिलिटी (मूल्य में अस्थिरता) से बचने के लिए वित्तीय अनुबंध करना अब कंपनी की प्राथमिकता हो सकता है।
सितंबर 2026 की चुनौतियां
कंपनी का यह रणनीतिक बदलाव उस समय हो रहा है जब वित्तीय दबाव साफ दिख रहा है। सितंबर 2026 की तिमाही में एयरलाइन ने ₹1,879.1 करोड़ का बड़ा नुकसान दर्ज किया। इसका सबसे बड़ा कारण जेट फ्यूल की ऊंची कीमतें (जो कुल खर्च का 40% हैं) और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट रहा है। फिलहाल कंपनी का कुल कर्ज (कैपिटलाइज्ड ऑपरेटिंग लीज लायबिलिटी समेत) ₹8,73,031 मिलियन पर खड़ा है।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी कर्ज का प्रबंधन कैसे करती है और क्या फ्यूल हेजिंग को लेकर कोई ठोस फैसला ले पाती है या नहीं।
