बाजार में रिकवरी और IndiGo की चाल
सोमवार, 2 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में वैल्यू बाइंग के चलते रिकवरी देखने को मिली, जिसमें बेंचमार्क निफ्टी 50 0.42% बढ़ा। इसी के साथ, IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयरों में 1.82% की उछाल आई और यह ₹4,658.80 पर बंद हुआ।
यह तेजी तब दिखी जब एयरलाइन ने जनवरी 2026 में पिछले साल की तुलना में एयर ट्रैफिक में 5.5% की बढ़ोतरी और 87.8% का पैसेंजर लोड फैक्टर दर्ज किया। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले लोड फैक्टर 250 बेसिस पॉइंट घटकर 87.8% रहा।?
दिसंबर तिमाही के नतीजे: लागत का भारी बोझ
यह ऑपरेशनल अपडेट दिसंबर तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद आया है। IndiGo ने दिसंबर तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में 78% की भारी गिरावट दर्ज की, जो ₹2,448.8 करोड़ से घटकर ₹549.1 करोड़ रह गया।
इस भारी गिरावट की मुख्य वजह ₹1,546.5 करोड़ के असाधारण खर्च रहे। इनमें से ₹577.2 करोड़ दिसंबर की शुरुआत में हुए बड़े फ्लाइट डिस्टर्बेंस के कारण थे, जबकि ₹969.3 करोड़ नए लेबर कानूनों के लागू होने से जुड़े थे। एयरलाइन को इन डिस्टर्बेंस के लिए ₹22.2 करोड़ का जुर्माना भी भरना पड़ा, जिसे एक एक्सेप्शनल आइटम के तौर पर दर्ज किया गया।?
इन प्रॉफिट हेडविंड्स के बावजूद, InterGlobe Aviation की कुल इनकम बढ़कर ₹24,540.6 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹22,992.80 करोड़ से अधिक है।
एनालिस्ट्स का भरोसा और भविष्य की योजनाएं
तिमाही नतीजों में गिरावट और ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स का IndiGo पर भरोसा कायम है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 27 एनालिस्ट्स में से 22 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जबकि 3 'Hold' और 2 'Sell' की सलाह दे रहे हैं। एवरेज 12-महीने का कंसेंसस प्राइस टारगेट ₹5,703.65 है, जो मौजूदा ट्रेडिंग प्राइस से 22.2% की संभावित बढ़त का संकेत देता है।
CEO Pieter Elbers ने 2030 तक 40% क्षमता अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगाने, 4,000 से ज्यादा दैनिक उड़ानें भरने और 200 मिलियन पैसेंजर्स को सालाना ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी के पास लगभग 900 विमान ऑर्डर पर हैं, जिनमें नए जनरेशन के A321 XLR भी शामिल हैं।?
सेक्टर की चुनौतियां और उम्मीदें
भारतीय एविएशन सेक्टर में लंबी अवधि में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें, रुपये का गिरना और बाजार में नए खिलाड़ियों के आने से वित्तीय दबाव भी बना हुआ है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि FY2026 में इंडस्ट्री को ₹17,000-18,000 करोड़ का घाटा हो सकता है। सरकार कस्टम ड्यूटी में छूट जैसे कदम उठाकर सेक्टर को सहारा दे रही है।