IndiGo Stock Price: तेल के झटके से IndiGo के शेयर धड़ाम! **8%** गिरी कीमत, जानिए वजह
Overview
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने आज InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयरों पर भारी दबाव डाला। इस वजह से कंपनी के शेयर **8%** तक गिर गए, जिससे निवेशकों में चिंता की लहर दौड़ गई।
Stocks Mentioned
तेल के आग से भागा IndiGo का शेयर
इस भारी गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेजी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल $82 प्रति बैरल के पार निकल गया है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) एयरलाइन कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का करीब 40% होता है, ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें सीधे IndiGo के प्रॉफिट मार्जिन पर भारी पड़ रही हैं। इसी तनाव के चलते लगभग 18% IndiGo के एयरक्राफ्ट की उड़ानों पर असर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय रूट पर दिक्कतें बढ़ गई हैं। अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड में हर $5 के उछाल से IndiGo के प्रति शेयर आय (EPS) में 13% तक की गिरावट आ सकती है।
एनालिस्ट की राय और मार्केट का रिएक्शन
बाजार की प्रतिक्रिया काफी तीखी रही, बावजूद इसके कि कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) ने IndiGo के शेयर पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹5,500 तय किया है। वहीं, Crisil ने भी कंपनी की बैंक फैसिलिटी रेटिंग को AA-/A1+ पर 'Positive' आउटलुक के साथ बनाए रखा है। लेकिन तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों ने इन सकारात्मक खबरों पर पानी फेर दिया। इसी डर के चलते 4 मार्च 2026 को शेयर ₹4,293 के 11 महीने के निचले स्तर पर भी पहुंच गया था।
वैल्यूएशन और सेक्टर का दबाव
IndiGo का P/E रेश्यो इस समय करीब 53x है, जो इसके ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा है। यह दर्शाता है कि अगर तेल की बढ़ती कीमतों से कमाई पर दबाव पड़ा तो स्टॉक महंगा साबित हो सकता है। भारतीय एविएशन सेक्टर वैसे भी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में सेक्टर को ₹170-180 बिलियन का शुद्ध नुकसान हो सकता है, हालांकि 2026-27 में इसमें सुधार की उम्मीद है। IndiGo अपनी 62% की डोमेस्टिक मार्केट शेयर के साथ लीडर है, लेकिन सेक्टर की समस्याओं से यह पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता।
अलग-अलग राय, बढ़ती चिंता
हालांकि, कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने IndiGo को कंज्यूमर स्पेंडिंग के प्ले के तौर पर देखा है, लेकिन हाल ही में Investec और MarketsMOJO जैसी फर्मों ने कॉस्ट प्रेशर को देखते हुए 'Sell' रेटिंग दी है। कुल 27 विश्लेषकों में से 22 'Buy' की सलाह दे रहे हैं, लेकिन यह बढ़ता हुआ मतभेद (divergence) भी चिंता का विषय है।
आगे क्या?
आगे चलकर IndiGo का प्रदर्शन कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों से निपटने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा। कोटक की 25% अपसाइड की उम्मीदों के सामने Investec और MarketsMOJO की 'Sell' रेटिंग एक विरोधाभास पैदा करती है। निवेशक आने वाले तिमाही नतीजों, फ्यूल प्राइस ट्रेंड्स और पैसेंजर ट्रैफिक डेटा पर कड़ी नजर रखेंगे।