सेक्टर में घाटे का अंबार, IndiGo अकेले सबसे आगे
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के नतीजे बताते हैं कि भारतीय एविएशन सेक्टर गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा है। पूरे सेक्टर ने मिलकर ₹5,289.73 करोड़ का घाटा दर्ज किया। इसमें सबसे बड़ा योगदान सरकारी कंपनी एयर इंडिया ग्रुप का रहा, जिसने अकेले ₹9,808.12 करोड़ का नुकसान उठाया। एयर इंडिया का खुद का घाटा ₹3,975.75 करोड़ रहा, जबकि उसकी सब्सिडियरी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने ₹5,832.37 करोड़ का नुकसान झेला।
यह स्थिति IndiGo (InterGlobe Aviation) के बिल्कुल उलट है, जिसने इस मुश्किल दौर में भी ₹7,253.30 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया। IndiGo की यह सफलता सेक्टर में बढ़ती असमानता को दर्शाती है।
घाटे में डूबे दूसरे खिलाड़ी
इंडिगो के अलावा, बाकी एयरलाइन्स भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। अकासा एयर (Akasa Air) ने ₹1,986.25 करोड़ का भारी घाटा दिखाया। सरकारी एयरलाइन अलायंस एयर (Alliance Air) का घाटा ₹691.12 करोड़ रहा, वहीं बजट एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) को ₹55.67 करोड़ का नुकसान हुआ।
IndiGo की सफलता का राज
IndiGo की लगातार तरक्की के पीछे कई बड़े कारण हैं। कंपनी के पास भारतीय एविएशन मार्केट का लगभग 62% मार्केट शेयर है, जिस पर वह 2007 से लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। इसकी मार्केट कैप (Market Capitalisation) ₹1.89 लाख करोड़ से भी ज्यादा है। साल 2023 में स्टॉक ने 48% और 2024 में 53.5% का शानदार रिटर्न दिया। साल 2026 की शुरुआत में भी यह 10.2% तक चढ़ा है। ब्रोकरेज फर्म्स (Brokerage Firms) भी IndiGo पर बुलिश (Bullish) हैं और इसके टारगेट प्राइस (Target Price) में 21% तक की बढ़त का अनुमान लगा रही हैं। कंपनी की सफलता का श्रेय उसकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency), नए और फ्यूल-एफिशिएंट (Fuel-efficient) विमानों के बेड़े और लागत प्रबंधन (Cost Management) को जाता है।
SpiceJet की मुश्किल भरी राह
दूसरी ओर, स्पाइसजेट (SpiceJet) की माली हालत बेहद चिंताजनक है। इसकी मार्केट कैप सिर्फ ₹3,382 करोड़ के आसपास है और बुक वैल्यू प्रति शेयर निगेटिव (Negative) है, जिसका मतलब है कि कंपनी पर देनदारी उसकी संपत्ति से ज्यादा है। पिछले पांच सालों में कंपनी की सेल्स ग्रोथ (Sales Growth) काफी कमजोर रही है और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) भी कम है। प्रमोटरों ने अपनी बड़ी हिस्सेदारी गिरवी रखी हुई है। कंपनी के शेयर में पिछले साल के मुकाबले 55% से ज्यादा की गिरावट आई है। एनालिस्ट्स (Analysts) के मुताबिक, इसकी इंट्रिन्सिक वैल्यू (Intrinsic Value) मौजूदा ट्रेडिंग प्राइस से काफी कम है।
एविएशन सेक्टर के सामने चुनौतियां
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में से एक है, जहां पैसेंजर ट्रैफिक (Passenger Traffic) प्री-पैंडेमिक (Pre-pandemic) लेवल से 11% ज्यादा हो गया है। सरकार भी एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (Airport Infrastructure) बढ़ा रही है। हालांकि, फ्यूल की बढ़ती कीमतें (Fuel Prices) और कैपेसिटी की कमी (Capacity Constraints) जैसी परिचालन लागतें (Operational Costs) एयरलाइन्स के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार ने एयरफेयर (Airfare) को पूरी तरह मार्केट फोर्सेज (Market Forces) पर छोड़ दिया है, जिसका मतलब है कि किराए तय करने का अधिकार पूरी तरह एयरलाइन्स के पास है।