InterGlobe Aviation ने साफ कर दिया है कि अपनी ग्लोबल एक्सपेंशन और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए कंपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेगी। कंपनी ने फंड जुटाने के बजाय रेवेन्यू-शेयरिंग और कमर्शियल गठबंधन पर दांव लगाने का फैसला किया है।
विस्तार की नई राह
InterGlobe Aviation (IndiGo की पैरेंट कंपनी) ने अपनी अंतरराष्ट्रीय विस्तार नीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी के मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि वे लंबी दूरी (Long-haul) के लक्ष्यों के लिए किसी बाहरी निवेशक को हिस्सेदारी नहीं देंगे। इसके बजाय, कंपनी Codeshare और Revenue-sharing जैसे कमर्शियल मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित करेगी।
फ्लीट में बड़े बदलाव की तैयारी
एयरलाइन अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बेड़े में बड़े विमानों को शामिल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का प्लान है कि 2027 के अंत तक 14 Airbus A321XLR विमानों को शामिल किया जाए, जिसके बाद 2028 की दूसरी तिमाही में A350-900 वाइड-बॉडी विमानों की डिलीवरी शुरू होगी। यह रणनीति घरेलू शॉर्ट-हॉल ऑपरेशंस की दक्षता को प्रभावित किए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैठ जमाने के लिए बनाई गई है।
वित्तीय चुनौतियों का साया
रणनीतिक बदलावों के बीच कंपनी की आर्थिक स्थिति पर दबाव भी साफ दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी ने ₹1,879.1 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। इस नुकसान की मुख्य वजह एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की ऊंची कीमतें रहीं, जिनका कुल ऑपरेटिंग खर्च में 37.8% हिस्सा था। इसके साथ ही रुपये में आई कमजोरी ने भी कंपनी के मार्जिन पर असर डाला है।
मार्केट और निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि, हालिया सत्रों में शेयर में तेजी देखी गई है। 3 नवंबर, 2026 तक कंपनी का शेयर 3 दिनों की रैली में रहा, जिसे क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट से सपोर्ट मिला। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनी बढ़ती ईंधन लागत और मुद्रा के उतार-चढ़ाव के बीच अपने लॉन्ग-हॉल विजन को कैसे मैनेज करती है।
