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IndiGo Share Price: यात्रियों को बड़ा झटका! बढ़ी Fuel Surcharge, शेयर पर क्या होगा असर?

TRANSPORTATION
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AuthorNeha Patil|Published at:
IndiGo Share Price: यात्रियों को बड़ा झटका! बढ़ी Fuel Surcharge, शेयर पर क्या होगा असर?
Overview

**IndiGo** ने Jet Fuel Prices में आई भारी तेजी के चलते अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर Fuel Surcharge में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। यह कदम ईंधन की लागत को पूरा करने और कंपनी के मुनाफे को बचाने के लिए उठाया गया है।

Middle East टेंशन और Jet Fuel Prices में आई बेतहाशा बढ़त का असर अब आम यात्रियों पर भी दिखेगा। एयरलाइन IndiGo ने अप्रैल 26 से Fuel Surcharge में बढ़ोत्तरी करने का फैसला किया है।

घरेलू उड़ानों के लिए, यह बढ़ोत्तरी ₹275 से लेकर ₹950 तक होगी, जो फ्लाइट की दूरी पर निर्भर करेगी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय रूट पर यह बढ़ोत्तरी और भी बड़ी है। साउथ एशिया से यूरोप के बीच की फ्लाइट्स के लिए, Fuel Surcharge ₹2,300 से बढ़कर ₹10,000 तक हो सकता है।

कंपनी का कहना है कि Jet Fuel की लागत डोमेस्टिक एयरलाइंस के लिए करीब 25% बढ़ गई है। IndiGo का लक्ष्य अपनी बेस फेयर और Revenue per Available Seat Kilometer (RASK) में लगभग 20% की बढ़ोत्तरी करके ईंधन की लागत में आई अनुमानित 50% की बढ़त को मैनेज करना है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन बेहतर हो सके।

IndiGo, जिसकी मार्केट वैल्यू लगभग ₹1.25 ट्रिलियन है, इस वक्त ₹3,250 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसका फॉरवर्ड Price-to-Earnings (P/E) रेश्यो करीब 38 है। इसके मुकाबले, SpiceJet की मार्केट वैल्यू करीब ₹2,000 करोड़ है और वह भारी घाटे में चल रही है। भारतीय एविएशन सेक्टर के 15-20% सालाना बढ़ने का अनुमान है, लेकिन ऊंचे ईंधन खर्च और कमजोर रुपये जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

हालांकि, Emkay Global Financial जैसी ब्रोकरेज फर्म्स ने IndiGo पर 'Buy' रेटिंग दी है, लेकिन ऊंचे किराए से यात्रियों की संख्या घटने का बड़ा रिस्क है। खास तौर पर मध्य पूर्व (Middle East) के रूट पर, जो IndiGo के लगभग 13-14% फ्लाइट्स को कवर करते हैं, रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।

Emkay Global Financial ने FY26, FY27, और FY28 के लिए अपने Earnings Per Share (EPS) अनुमानों को क्रमशः 13%, 28%, और 7% तक घटा दिया है। उन्होंने IndiGo का टारगेट प्राइस ₹5,500 कर दिया है, जो मार्च 2028 के अनुमानित EPS का 20 गुना है। ब्रोकरेज फर्म्स लंबी अवधि में एविएशन सेक्टर की डिमांड को लेकर तो पॉजिटिव हैं, लेकिन मौजूदा लागत दबाव के चलते शॉर्ट-टर्म Profitability पर नजर रखे हुए हैं।

कुल मिलाकर, IndiGo के लिए यह एक नाजुक संतुलन बनाने वाला कदम है, जहां कंपनी को लागत प्रबंधन और यात्री संख्या बनाए रखने के बीच सही तालमेल बिठाना होगा।

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