IndiGo पर CCI का शिकंजा! दिसंबर की फ्लाइट कैंसलेशन पर जांच शुरू, शेयर पर असर?

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AuthorMehul Desai|Published at:
IndiGo पर CCI का शिकंजा! दिसंबर की फ्लाइट कैंसलेशन पर जांच शुरू, शेयर पर असर?
Overview

IndiGo के निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है! देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी अब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच के दायरे में आ गई है। यह जांच दिसंबर महीने में हुई भारी संख्या में फ्लाइट कैंसलेशन और ऑपरेशनल दिक्कतों को लेकर की जा रही है।

रेगुलेटर का शिकंजा: CCI ने IndiGo को घेरा

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने IndiGo के खिलाफ दिसंबर में हुई व्यापक फ्लाइट कैंसलेशन और ऑपरेशनल रुकावटों को लेकर जांच शुरू कर दी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों के अनुसार, इन दिक्कतों का सीधा असर 9.82 लाख यात्रियों पर पड़ा। एयरलाइन को यात्रियों को ₹22.74 करोड़ का मुआवजा और सहायता राशि देनी पड़ी। दिसंबर में IndiGo की कैंसलेशन रेट 9.65% तक पहुंच गई, जो कि डोमेस्टिक एयरलाइंस के 6.92% के औसत से काफी ज्यादा है। इस जांच से एयरलाइन की ऑपरेशनल विश्वसनीयता और क्षमता प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मार्केट शेयर में सेंध, प्रतिद्वंद्वियों की चांदी

IndiGo की ऑपरेशनल दिक्कतों का सीधा असर उसके मार्केट शेयर पर भी पड़ा। दिसंबर में कंपनी का डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक में हिस्सा घटकर 59.6% रह गया, जबकि नवंबर में यह 63.6% था। इस गिरावट का फायदा एयर इंडिया ग्रुप, अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने उठाया। एयर इंडिया ग्रुप ने अपना मार्केट शेयर 26.7% से बढ़ाकर 29.6% कर लिया। वहीं, अकासा एयर का शेयर 4.7% से बढ़कर 5.2% और स्पाइसजेट का 3.7% से बढ़कर 4.3% हो गया। यह साफ दिखाता है कि IndiGo की मुश्किलों के बीच उसके प्रतिद्वंद्वियों ने बाजी मारी। बता दें कि ₹1.02 ट्रिलियन की मार्केट कैप वाली IndiGo, लगभग ₹4.5 बिलियन मार्केट कैप वाली स्पाइसजेट से कहीं बड़ी है, जिसका P/E रेश्यो भी दिक्कतों का संकेत दे रहा है।

पूरे सेक्टर पर यात्रियों की नाराजगी

सिर्फ IndiGo ही नहीं, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में यात्रियों को दिसंबर में परेशानी का सामना करना पड़ा। सभी डोमेस्टिक एयरलाइंस ने मिलकर 10.46 लाख से ज्यादा यात्रियों को ₹24.27 करोड़ से अधिक का मुआवजा और सुविधाएं दीं। 8.34 लाख यात्रियों को फ्लाइट में देरी का सामना करना पड़ा, जिसके लिए एयरलाइंस ने ₹4.50 करोड़ खर्च किए। वहीं, 2,050 यात्रियों को बोर्डिंग से मना करने पर ₹2.08 करोड़ का मुआवजा देना पड़ा। दिसंबर महीने में कुल 29,212 यात्री शिकायतें दर्ज हुईं, जो प्रति 10,000 यात्रियों पर करीब 20.41 की दर से है।

सेक्टर का भविष्य और एक्सपर्ट्स की राय

भारतीय एविएशन सेक्टर सालाना 3.48% की ग्रोथ दिखा रहा है, जिसमें जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 1,669.46 लाख यात्रियों ने सफर किया। हालांकि, दिसंबर महीने में ही 4.14% की मासिक गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की IndiGo को लेकर राय आम तौर पर सकारात्मक बनी हुई है, उनके प्राइस टारगेट में तेजी के संकेत हैं। हालांकि, ऑपरेशनल परफॉरमेंस और बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर बारीकी से नजर रखने की सलाह है। वहीं, स्पाइसजेट की वित्तीय स्थिति और कर्ज को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिस कारण इस पर एक्सपर्ट्स की राय मिली-जुली है। सेक्टर में आगे भी मांग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। IndiGo पर चल रही CCI की जांच भविष्य की प्लानिंग और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले उसकी पोजीशन पर असर डाल सकती है, खासकर एयर इंडिया ग्रुप जैसी एयरलाइंस के खिलाफ जो अधिग्रहण के बाद से लगातार अपना मार्केट शेयर बढ़ा रही है।

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