IndiGo का बड़ा प्लान: घरेलू हब से दुनिया भर में पैसेंजर उड़ाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
IndiGo का बड़ा प्लान: घरेलू हब से दुनिया भर में पैसेंजर उड़ाने की तैयारी

घरेलू उड़ानों में अपनी बादशाहत कायम कर चुकी IndiGo अब इंटरनेशनल पैसेंजर्स को अपने डोमेस्टिक हब के ज़रिए जोड़ने का प्लान बना रही है। एयरलाइन अपनी लगभग 1,000 एयरक्राफ्ट की विशाल ऑर्डर बुक का इस्तेमाल फ्यूचर में लंबी दूरी की उड़ानों के लिए करेगी।

घरेलू हब से इंटरनेशनल उड़ानों का जाल

InterGlobe Aviation, जो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo का संचालन करती है, अब इंटरनेशनल मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने हाल ही में बताया कि एयरलाइन अपने मजबूत घरेलू नेटवर्क का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल ट्रैफिक को कैप्चर करना चाहती है। भारत के अंदर ही ट्रांजिट हब बनाकर, कंपनी का लक्ष्य भारतीय यात्रियों को दुनिया भर के डेस्टिनेशंस तक पहुंचाना है, जो कि अभी इंटरनेशनल एयरलाइन्स का गढ़ माना जाता है।

इंटरनेशनल ग्रोथ के लिए तैयारी

IndiGo साल 2011 से मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया और सेंट्रल एशिया जैसे रीजन्स के लिए उड़ानें भर रही है। DGCA के आंकड़ों के मुताबिक, भारत से ओरिजिनेट होने वाले इंटरनेशनल ट्रैफिक में एयरलाइन की हिस्सेदारी करीब 20% है। हालांकि, अब तक लंबी दूरी की कनेक्टिविटी, जैसे यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के लिए, IndiGo काफी हद तक पार्टनरशिप पर निर्भर रही है। लेकिन नई स्ट्रैटेजी के तहत, कंपनी इस ग्रोथ को खुद के दम पर हासिल करना चाहती है। लंबी दूरी की उड़ानें शुरू करने से पहले, एयरलाइन अपने डोमेस्टिक नेटवर्क को और मजबूत करेगी ताकि इंटरनेशनल रूट्स के लिए पर्याप्त पैसेंजर्स मिल सकें।

फ्लीट का विस्तार और बिजनेस में डाइवर्सिफिकेशन

इस स्ट्रेटेजी को कामयाब बनाने के लिए IndiGo के पास एक बड़ा एयरक्राफ्ट पाइपलाइन है। 480 प्लेन्स के बड़े ऑर्डर के अलावा, IndiGo के पास 2030 से 2035 के बीच डिलीवर होने वाले 500 Airbus एयरक्राफ्ट और हैं। यह विशाल विस्तार डोमेस्टिक ग्रोथ और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी में ट्रांजिशन, दोनों को सपोर्ट करने के लिए है।

सिर्फ एयरलाइन ऑपरेशंस के अलावा, कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को डाइवर्सिफाई करने पर भी काम कर रही है। एयरलाइन का लॉयल्टी प्रोग्राम, BluChip, जिसके 10 मिलियन से ज्यादा मेंबर्स हैं, उसे एक इंडिपेंडेंट बिजनेस यूनिट के तौर पर डेवलप किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रमोटर ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी आर्म, InterGlobe, अगले दो सालों में पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी में है। ये कदम सेकेंडरी एसेट्स को मोनेटाइज करने और एयरलाइन को स्ट्रेटेजिक हब एक्सपेंशन पर फोकस करने के संकेत देते हैं।

निवेशकों को भारतीय एयरपोर्ट्स पर कंपनी की इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेबिलिटी पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि लंबी दूरी के ट्रैफिक के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल की सफलता के लिए सीमलेस ट्रांजिट फैसिलिटीज जरूरी होंगी। इसके अलावा, आने वाले सालों में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन्स का आकलन करने के लिए एयरक्राफ्ट डिलीवरी की स्पीड और इंटरनेशनल रूट्स पर कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग एनवायरनमेंट की निगरानी करना भी महत्वपूर्ण होगा। बड़े फ्लीट को मैनेज करने से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव स्टैंडर्ड इंडस्ट्री वेरिएबल्स बने रहेंगे जिन पर नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.